कादरचौक क्षेत्र में मौजूद सारस। संवाद
वन विभाग की गणना में मिले मात्र तीन जोड़े
संवाद न्यूज एजेंसी
कादरचौक। वन, नदी, झील के खत्म होने से सारस विलुप्त होते जा रहे हैं। कादरचौक क्षेत्र में एक दशक पूर्व तक लगभग 50 जोड़ों के आसपास सारस थे। जो धीरे-धीरे घटते चले गए, हालात यह हैं कि अब मात्र तीन जोड़े इस क्षेत्र में रह गए हैं।
कादरचौक क्षेत्र की वन भूमि, वेटलैंड की अधिकता के कारण सारस पक्षियों के लिए बहुत ही उपयोगी थी, लेकिन नाहरगोर और नूरपुर की झील, गंगा की सहायक सोत नदी, भैंसोर नदी के सूख जाने के कारण यह क्षेत्र सारस के निवास के लिए उपयुक्त नहीं बचा तो कुछ घुमंतू प्रजाति के लोगों ने सारस का शिकार करना भी शुरू कर दिया। ऐसे में सारस की संख्या भी कम होने लगी।
अब हालात यह हो गए हैं कि वन विभाग को खोज में अब तक मात्र तीन जोड़ी सारस मिले हैं। जिनमें एक जोड़ा नूरपुर, एक ककोड़ा और एक भदरौल इलाके में मिला है। इस संबंध में वानिकी अधिकारी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि गणना की जा रही है, गणना पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।