मोर्चरी के बाहर जानकारी देते परिवार वाले
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बदायूं के वजीरगंज कस्बे में शनिवार रात एक मकान की छत पर बंदर आपस में लड़ने लगे। उनसे बचकर भागने के चक्कर में 55 वर्षीय रामबहादुर की गिरकर मौत हो गई। वह अपने साढ़ू के घर आए हुए थे।
बरेली के आंवला कोतवाली क्षेत्र के गांव भूरीपुर निवासी रामबहादुर का एक साढ़ू राजेंद्र वजीरगंज कस्बे में रहते हैं और दूसरे गांव ब्यौली में। वह शुक्रवार को ब्यौली दावत खाने आए थे और शनिवार को वजीरगंज में राजेंद्र के घर आ गए। रात में खाना खाकर छत पर बने कमरे में लेट गए। बताते हैं कि वह रात करीब दो बजे लघुशंका करने उठे होंगे, तभी बंदरों का झुंड आ गया। बंदर आपस में लड़ने लगे। इससे परिवार वाले भी जाग गए। जब बंदर नहीं भागे तो परिवार के लोग छत पर पहुंचे। उन्होंने किसी तरह डंडा लेकर उन्हें भगाया।
उन्होंने रामबहादुर को देखा तो वह कमरे में नहीं थे। वह मकान के पीछे सड़क पर पड़े थे। परिवार वाले उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले गए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया। आशंका जताई जा रही है कि वह बंदरों से बचने के लिए भागे होंगे, छत से गिरकर उनकी मौत हो गई। सूचना पर रामबहादुर के परिवार वाले आ गए। थाना पुलिस ने रविवार दोपहर उनके शव का पोस्टमार्टम करा दिया। परिवार वाले उनके शव को भूरीपुर गांव ले गए हैं। देर शाम उनके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बंदरों की वजह से कई लोग गंवा चुके हैं जान
कई इलाकों में बंदरों की काफी संख्या है। ये लोगों का तमाम नुकसान करते हैं और कई लोगों की बंदरों के हमले में मौत भी हो गई है। 30 जुलाई को दातागंज के ढिलवारी गांव में एक महिला की मौत हुई थी। उससे पहले गांव में दो और महिलाएं छत से गिर गई थीं। दो माह पहले उसावां इलाके के रिजोला गांव में एक व्यक्ति की मौत हो गई। उससे पहले मुजरिया क्षेत्र के गांव दरियापुर में एक किसान की जान जा चुकी है।