शहर से होकर निकल रही सोत नदी सूखने के कगार पर। संवाद
बदायूं/उझानी। जिले से होकर निकलने वाली नदियों में भैंसोर और असवार विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई हैं। अरिल, महावा और सोत नदी ने इलाके के किसानों को सिंचाई के प्रमुख संसाधन के रूप में फायदा भी पहुंचाया, लेकिन कहीं कब्जे तो कहीं सिल्ट जमा हो जाने से इनका वजूद भी सिमटता गया। अब इन नदियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
अरिल नदी रामपुर जिले की शाहबाद तहसील क्षेत्र से शुरू होकर बदायूं के बिसौली, बिनावर और बरेली के आंवला के कुछ रकबा को अपने से जोड़ती हुई दातागंज और उसहैत इलाके से होकर शाहजहांपुर जिले की ओर निकल जाती है। इसी तरह मुरादाबाद जिले के गजरौला क्षेत्र से निकलकर सहसवान तहसील क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों के किसानों क लिए वरदान साबित होने वाली महावा का प्रवाह गंगा के करीब तक रहा है। बारिश के दिनों में महावा का विस्तार (फांट) छह-सात सौ मीटर तक हो जाता है। महावा में कभी गजरौला की फैक्ट्रियों का गंदा पानी पहुंच जाता था, लेकिन एक दशक से ऐसा नजर नहीं आता। मानसून के बाद अरिल की तरह ही महावा में भी पानी बहुत कम नजर आता है। सोत नदी बदायूं शहर के बाहरी छोर से होकर गुजरती है। मुरादाबाद के जोधा इलाके से शुरू सोत नदी बिसौली, बिल्सी और उसहैत का हिस्सा बनी हुई है। शहर में इस नदी पर कब्जे के मामले भी सामने आ चुके हैं। भैंसोर नदी संभल जिले से शुरू होकर फर्रुखाबाद तक जाती है। भैंसोर पर बिल्सी और सदर तहसील के उझानी क्षेत्र में कब्जे हो चुके हैं। यहां भी भैंसोर का वजूद बचा है, वह भी बारिश के बाद नजर नहीं आता।
असवार की स्थिति तो पहले से ही काफी खराब है। बिल्सी-मुजरिया रोड पर गांव मिश्रीपुर मुकुइया के पास पुल ही असवार का इकलौता नमूना बचा है। इलाके के लोगों में प्रेमपाल सिंह बताते हैं कि असवार और भैंसोर का सबसे ज्यादा फायदा किसानों का होता था। उन्हें सिंचाई के लिए भटकना भी नहीं पड़ता था।
गंगा और रामगंगा का है सबसे ज्यादा रकबा
गंगोत्री से प्रयागराज होकर गंगा सागर तक अवरिल बहने वाली गंगा की जलधारा बदायूं जिले के लिए भी मुफीद रही है। सहसवान, उझानी, कादरचौक और उसहैत क्षेत्र को जोड़ती हुई निकली गंगा के कई घाट आस्था से जुड़े हैं। कछला घाट इनमें प्रमुख है। कछला घाट के जीर्णोद्धार के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा पहल कर चुके हैं। उन्होंने इसके लिए प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय से धनराशि भी स्वीकृत करा दी है। इसी तरह रामगंगा बरेली से होती हुई बदायूं के दातागंज को जोड़ती है।