बदायूं। सूफियों की इस जमीं पर कभी जीवनदायिनी नदियाें की कल-कल सुनाई पड़ती थी, लेकिन आज इनका वजूद खत्म होने के कगार पर है। कुछ नदियां विलुप्त हो चुकी हैं तो कुछ इतनी प्रदूषित हो गईं हैं कि नदियाें के नाम पर वह नाला भर बनकर रह गईं हैं।
जिले में नदियों की बात करें तो गंगा व रामगंगा दो बड़ी नदियां हैं। इसके अलावा सोत नदी, अरिल नदी, भैसोर नदी व महावा नदी बदायूं से होकर गुजरती हैं। गंगा व रामगंगा में तो जल रहता है, लेकिन बाकी की चार नदियों का अस्तित्व संकट में हैं। संभल की तरफ से आकर शाहजहांपुर की तरफ जाने वाली सोत नदी जिले में 177.5 किलोमीटर में बहती है। कागजों में यह नदी है, लेकिन वास्तविकता में जगह-जगह कब्जे हो चुके हैं।
शहर में लालपुल के पास तो यह नदी सिमटकर नाला बन गई है। जगह-जगह नालों का पानी इसमें गिरने से नदी का पानी प्रदूषित हो चुका है। वहीं अरिल नदी बिसौली की तरफ से आकर दातागंज में रामगंगा में मिल जाती है। यह जिले में 37 किलोमीटर के दायरे में बहती है। अरिल नदी में कहीं-कहीं ही पानी है। अधिकांश जगह यह सूख चुकी है।
भैंसोर नदी की बात करें तो यह इस्लामनगर से होते हुए उसहैत में जाकर रामगंगा में मिल जाती है। जिले में यह 121 किलोमीटर में बहती थी। मौजूदा हाल यह है कि भैंसोर नदी का अस्तित्व ही समाप्ति की ओर है। वहीं महावा नदी जिले में 48 किलोमीटर में बहती है ओर सहसवान में गंगा में जाकर मिल जाती है। इस नदी में भी पानी नहीं है।
नदियों को लेकर जिले के अधिकारियों ने कोई खासी दिलचस्पी भी नहीं दिखाई। यही कारण है कि धीरे-धीरे इन नदियों का अस्तित्व समाप्ति की ओर आ गया। इन नदियों को पुन: जीर्णोद्धार की बातें खूब हुईं, कागजाें पर योजनाएं भी बनीं, लेकिन इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका। सिंचाई व बाढ़ खंड विभाग के रिकॉर्ड में ये नदियां दर्ज तो हैं, लेकिन हकीकत में यह सूखी नदी बनकर रह गईं हैं।
बरसात में रहता है थोड़ा बहुत पानी
बाढ़ खंड के अधिकारी मानते हैं कि सोत, अरिल, भैंसोर व महावा नदी में पानी नहीं है। महज बरसात के सीजन में इनमें थोड़ा बहुत पानी रहता है। ये नदियां जिन तहसील क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं वहां के अधिकारियों के ध्यान न देने के कारण अब इनका नामों निशान मिटने के कगार पर है।
बदायूं सिंचाई परियोजना पूरी हो तो नहरों का फैले जाल
बदायूं सिंचाई परियोजना पर 2012 में काम शुरू हुआ था, लेकिन आजतक इसका काम पूरा नहीं हो सका है। 630 करोड़ की यह परियोजना अब 3200 करोड़ तक जा पहुंची है, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका। परियोजना के तहत बरेली रामगंगा से बदायूं की दातागंज तहसील के हजरतपुर तक 46 किमी लंबी नहरें बनाई जानी थीं। बाढ़ खंड के अधिकारियों का कहना है रामगंगा बैराज का काम पूरा होने पर दातागंज के इलाकों में नहरों का जाल फैल सकता है।
जिले की नदियों को बचाने के लिए दशहरे से शुरू होंगे प्रयास : शिप्रा पाठक
वाटर वूमेन शिप्रा पाठक का कहना है कि जिले की नदियों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। आगामी दशहरे से कागजों पर किए गए प्रयास धरातल पर भी दिखाई देने लगेंगे। शिप्रा का कहना है कि शासन स्तर पर बात करके यहां अभियान चलाया जाएगा।
जिले में गंगा और रामगंगा नदी में तो जल रहता है। बाकी नदियों में जलस्रोत न होने के कारण यह सूख रहीं हैं। बरसात में इनमें पानी भर जाता है। इनके जीर्णोद्धार के प्रयास किए जाएंगे। -उमेश चंद्र, एक्सईएन, बाढ़ खंड
शहर के लालपुल से गुजरती सोत नदी। संवाद