उझानी। पाल का नगला गांव के जंगल में मय लोडर वाहन पशु चोर दो भाइयों में एक को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। पकड़े गए आरोपी नीरज की निशानदेही पर तमंचा भी बरामद हुआ है। पुलिस ने उसके दो अन्य साथियों की तलाश में कई स्थानों पर दबिश दी है।
कछला रोड पर भूड़ वाली ज्यारत के पास पुलिस के हत्थे चढ़ा नीरज कोतवाली क्षेत्र के गांव बरसुआ निवासी भूरे का पुत्र है। पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को बताया कि घटना में वह भी शामिल था। शनिवार तड़के भैंस चोरी की घटना के दौरान जाग होने पर ग्रामीणों ने जब घेराबंदी कर उसके गिरोह के बरेली के भमोरा थाना क्षेत्र में गांव सेंधा निवासी लटूरी और जसवीर को पकड़ लिया तो वह मौके पर से भाग निकला। लटूरी ने ही अपने फरार साथियों के नाम पुलिस को बताए थे। घटना में नीरज के अलावा सहसवान के गांव शहबाजपुर का कलक्टर सिंह और आंवला क्षेत्र का बाबा जी भी शामिल था।
पशु चोर नीरज की निशानदेही पर तमंचा भी बरामद कर लिया है। वह लटूरी का ही रिश्तेदार है। रेकी करके नीरज ही सरगना भाइयों समेत अन्य साथियों को बुलाता था। पुलिस ने नीरज की गिरफ्तारी के बाद बाबा जी और कलक्टर की तलाश में कई स्थानों पर दबिश भी दी, लेकिन दोनों में कोई भी अपने संभावित ठिकानों पर नहीं मिला।
प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इसी गिरोह ने पिछले दिनों गुलड़िया नगला से भैंस और पाल का नगला गांव से पांच बकरा-बकरी चोरी किए थे, जो राहगीरों के हाथ सस्ते में बेचकर रुपये पांचों चोरों ने आपस में बांट लिए थे। प्रत्येक के हिस्से में चार-चार हजार रुपये आए थे।
फायर मिस नहीं होता चली जाती किसी ग्रामीण की जान
पकड़े गए आरोपी नीरज ने पुलिस को बताया कि ग्रामीणों की भीड़ ने जब लटूरी और जसवीर को पकड़कर पीटना शुरू किया तो उसने तमंचा से भीड़ पर फायर करने की कोशिश की। ताकि वह दोनों को छुड़ा ले जाने में सफल हो जाए, लेकिन कारतूस मिस हो गया। गोली चलने पर सामने जो भी आता, उसकी जान चली जाती। इसके बाद भागते समय उसे पीछे मुड़कर नहीं देखा। नीरज समेत तीनों चोर एक-दूसरे की विपरीत दिशा में खेतों से होकर भागे थे। एक ही दिशा में भागते तो वह भी लटूरी और जसवीर की तरह ग्रामीणों के हत्थे चढ़ जाते।
संजरपुर हल्का से आरोपी सिपाही हटाया गया
शनिवार सुबह पशु चोरों की पिटाई और हंगामा के दौरान ग्रामीणों की भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने एक सिपाही की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई थी। इसके बाद पुलिस अफसरों ने सिपाही की भूमिका की जांच कराने का भी आश्वासन दिया था। जांच होने तक सिपाही को संजरपुर हल्का से हटा दिया गया है। प्रभारी निरीक्षक मनोज सिंह ने बताया कि सिपाही पर लगे आरोपों के बारे में फिलहाल को सबूत नहीं मिला है।