बदायूं। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत सरकार देश को वर्ष 2025 तक क्षय रोग मुक्त करने के लिए अभियान चला रही है। इस दौरान जिले में मिलने वाले नए टीबी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में जिले में क्षय रोगियों की संख्या 5680 तक पहुंच गई है। औसतन जिले में टीबी के दस नए मरीज रोजाना मिल रहे हैं, जो कार्यक्रम चलने के बावजूद चिंता का विषय बन रहा है।
जिला अस्पताल स्थित जिला क्षय रोग नियंत्रण केंद्र की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 60 से 70 मरीज पहुंचते हैं। एक्स-रे समेत कई पैथोलोजी जांचों के बाद ही किसी मरीज में टीबी की पुष्टि की जाती है। टीबी विभाग में जिला क्षय रोग अधिकारी के नाम पर एक चिकित्सक डॉ. विनेश कुमार की तैनाती है।
डिप्टी क्षय रोग अधिकारी डॉ. आरपी सिंह का पिछले दिनों शासन स्तर से तबादला कर दिया गया था। उनके स्थान पर अभी किसी की तैनाती नहीं की गई है। एनटीईपी के तहत टीबी की सभी तरह की मुफ्त जांच और इलाज की व्यवस्था है, लेकिन इसके बावजूद जिले में मरीजों की संख्या बढ़ना भी चिंता का विषय है। कुछ ऐसे रोगी भी हैं, जिन्होंने छह माह और फिर तीन माह तक नियमित दवा नहीं ली। अब इनकी बीमारी बिगड़ गई है।
टीबी के प्रारंभिक लक्षण
- लगातार तीन सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहना।
- सांस फूलना, सांस लेने में तकलीफ होना।
- अक्सर बुखार आना, जल्दी थकावट महसूस होना।
- सीने में अक्सर तेज दर्द होना।
- शरीर का वजन अचानक तेजी से कम होना।
- बलगम के साथ खून का आना।
यह हैं अहम कारण-
- टीबी एक संक्रामक रोग है, जो हवा और सांस से फैलता है। जब कोई टीबी का मरीज खांसता या छींकता है, तो उससे निकलने वाले कणों के संपर्क में आने से टीबी हो सकता है। इसके अलावा धू्म्रपान भी टीबी होने का बहुत बड़ा कारण है।
ऐसे करें बचाव-
- बच्चों को बीसीजी का टीका लगवाएं।
- टीबी के मरीज के संपर्क में आने से बचें।
- मरीज का बेड, तौलिया आदि शेयर न करें।
- एक ही कमरे में न सोएं।
- मास्क का इस्तेमाल करें।
- अगर किसी को टीबी की पुष्टि हो जाए तो सार्वजनिक जगहों पर जाने से बचें।
- डॉक्टर के संपर्क में रहें और इलाज पूरा करें।
मरीज को हर माह पौष्टिक आहार के लिए 500 रुपये भी
टीबी के मरीज को मुफ्त इलाज के साथ पौष्टिक आहार के लिए हर माह सरकार पांच सौ रुपये भी दे रही है। यह राशि हर माह डीबीटी (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर) के माध्यम से उनके खाते में भेजी जाती है। मरीज समय पर दवा ले रहा है, इसकी भी मॉनीटरिंग डॉट्स सेंटर और आशा कार्यकर्ताओं के जरिये कराई जाती है। पांच सौ रुपये प्रतिमाह मरीज के स्वस्थ होने तक दिए जाते हैं। दवा का कोर्स पूरा होने के बाद फिर से मरीज की जांच कराई जाती हैं।
मरीज के घर तक दवा
पहुंचाने की व्यवस्था
अभियान के तहत टीबी के मरीज के घर तक दवा पहुंचाने की भी व्यवस्था है। मरीज का पूरा ब्योरा मोबाइल नंबर के साथ ऑनलाइन रखा गया है। जिला क्षय रोग नियंत्रण केंद्र से दवाओं को सीएचसी स्तर पर हर माह मरीज के नामों से अलग-अलग डिब्बों में भेजा जाता है। यहां से डॉट्स सेंटर और आशा वर्कर दवाओं को मरीज तक पहुंचाती हैं।
क्षय रोग नियंत्रण केंद्र की ओपीडी में रोजाना औसतन 60 से 60 मरीज आते हैं। अभियान के दौरान प्रतिदिन करीब दस नए मरीज मिल रहे हैं। टीमों को घर-घर भेज कर रोगी खोज अभियान भी चलाया जा रहा है। रोग का प्रमुख कारण कुपोषण और धूम्रपान है। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत देश को 2025 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य है। - डॉ. विनेश कुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी
डॉ. विनेश कुमारा।- फोटो : BADAUN