कछला घाट पर टहलते समय पैर फिसल जाने से महंत रामदास त्यागी गंगा में गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई। शव नदी में किनारे आया तो आसपास आश्रमों के महात्माओं की नजर पड़ी। पुलिस को मौके पर बुला लिया गया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
महंत रामदास त्यागी (70) रोजाना सुबह गंगा किनारे टहला करते थे। मूलरूप से वाराणसी निवासी महंत त्यागी करीब तीन दशक से कछला गंगाघाट पर रहते थे। उन्होंने पहले आश्रम बनाया, फिर उसी परिसर में राधा-कृष्ण मंदिर का भी निर्माण कराया था। मंदिर की देखरेख भी वह खुद ही किया करते थे। शुक्रवार रात आश्रम परिसर में वह अकेले ही थे। पड़ोसी आश्रम के महात्मा राजेश की नजर सुबह गंगा किनारे पड़े उनके शव पर गई, तो उन्होंने आसपास आश्रमों के संतों को भी बुला लिया।
कुछ आश्रम संचालकों ने बताया कि हादसे से पहले उन्हें टहलते देखा गया था। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार ने शव कब्जे में लेने के बाद घाट समेत आश्रमों में मौजूद कई लोगों से बात की। कुछ महात्माओं ने त्यागी के शव का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया। पुलिस कर्मियों के समझाने पर महात्मा पोस्टमार्टम कराने के लिए रजामंद हो गए।
चौकी इंचार्ज ने बताया कि शव कब्जे में लेकर बदायूं भेज दिया गया है। टहलते समय ही पैर फिसल जाने से वह गंगा में गिर गए थे। दरअसल, गंगा घाट के कुछ लोगों ने महंत की मौत संदिग्ध हालात में होना बताकर सवाल उठाए थे। इसी के चलते पुलिस को भी पोस्टमार्टम कराने के लिए जोर देना पड़ा।