बदायूं। दवाओं की कमी होने के कारण जिले से सीएचसी-पीएचसी के क्षय रोगियों के लिए दवा की आपूर्ति बंद कर दी गई है। मजबूरी में स्वास्थ्य अधीक्षकों को अपने स्तर से ही दवाएं खरीदनी पड़ रहीं हैं। जिला स्तर से जो बजट दिया जा रहा है उससे मरीजों को तीन दिन से अधिक की दवा दिया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। दवा का चक्र टूटने से मरीज सही नहीं हो पा रहे हैं।
दबतोरी पीएचसी पर दवा न होने से मरीजों को 15 किलोमीटर दूर आसफपुर सीएचसी की दौड़ लगानी पड़ रही है। क्षय रोग सांस से फैलता है। दवा वितरण करते समय मरीज, डॉक्टर और कर्मचारी सावधानी भी नहीं बरत रहे। यही कारण है कि जिले में 11 हजार से अधिक लोग क्षय रोग से संक्रमित हैं। इससे अधिक मरीज प्राइवेट में इलाज करा रहे हैं। अगर मरीज की दवा टूटती है तो मरीज को पूरा कोर्स दोबारा करना होता है। एक हजार से अधिक ऐसे मरीज हैं, जो पिछले समय अस्पताल में दवा खत्म होने पर मेडिकल स्टोर से दवा नहीं ले सके और दवा टूट गई। इनको दोबारा से कोर्स करना होगा।
दवा लेने के लिए कई बार जाना होता है अस्पताल
सैदपुर। सीएचसी पर क्षय रोग के मरीजों को दवा तो दी जा रही है, लेकिन पांच दिन से अधिक नहीं मिल पा रही है। लैब टेक्नीशियन अनूप कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि किसी मरीज की 3 गोली और किसी की 2 गोली चल रही हैं, उसी हिसाब से प्रत्येक मरीज को 5 दिन की दवा दी जाती है। नौली हरनाथपुर से आए मरीज प्रद्युम्न ने बताया कि पांच दिन की दवा मिलने से हर महीने कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। पहले महीने में दो बार ही दवा मिलती थी।
बेपरवाह दिखे मरीज और डॉक्टर-कर्मचारी
उझानी। क्षय रोग एक-दूसरे के संपर्क में आने और संक्रमित सांस से फैलता है। मरीज और डॉक्टर दोनों को ही मास्क लगाकर अस्पताल में रहना चाहिए, लेकिन बुधवार को देखा गया कि न तो मरीज मास्क लगाए थे न ही डॉक्टर और कर्मचारी। दोपहर तक 40 महिला और पुरुषों ने क्षय रोग की तीन-तीन दिन की दवा ली।
दबतोरी क्षेत्र के लोगों को 15 किमी की लगानी पड़ती है दौड़
दबतोरी। नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दबतोरी पर क्षय रोग की दवा का वितरण नहीं किया जाता है। क्षेत्र के लोगों को 15 किलोमीटर दूर जाकर आसफपुर सीएचसी से दवा लेनी होती है। तीन-तीन दिन की दवा मिलने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टर जहीर अहमद ने बताया कि हमारे यहां डॉट सेंटर नहीं है, इसलिए मरीजों के लिए दवा नहीं आती। मरीजों को सीएचसी पर भेजा जाता है। संवाद
एक बार में 15 दिन की मिले दवा
वजीरगंज। पुसगवां निवासी मरीज जाहिद अली ने बताया कि महीने में छह-सात बार दवा लेने आना पड़ता है। दवा दो से तीन दिन तक की ही मिल पाती है। दवा के लिए परेशान होना पड़ रहा है। एक बार में 15 दिन की दवा मिले तो परेशानी दूर हो। संवाद
शासन से मिलने वाली दवा की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। दवा को स्थानीय स्तर से खरीदवाया जा रहा है। मरीजों को भी उसी के हिसाब से दवा बांटी जा रही है। कोशिश यह की जा रही है कि किसी भी मरीज की दवा टूटने न पाए। -डॉ. विनेश कुमार, क्षय रोग अधिकारी
जिला अस्पताल के टीबी वार्ड में दवा लेने को खड़े मरीज। संवाद
जिला अस्पताल के टीबी वार्ड में दवा लेने को खड़े मरीज। संवाद