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तीन चीनी मिलों पर जिले के गन्ना किसानों का 32.71 करोड़ फंसा 

Tue, 01 Aug 2017 05:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
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- फोटो : demo pic
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सरकार और चीनी मिलों के बीच चल रही खींचतान की वजह से जिले के गन्ना किसानों के दो चीनी मिलों पर 16.32 करोड़ रुपये फंस गए हैं तो सहकारी क्षेत्र की शेखूपुर चीनी मिल ने भी अब तक किसानों का 16.38 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया है। बार-बार नोटिस दिए जाने के बाद भी चीनी मिलें किसानों का भुगतान नहीं कर रहीं। निजी क्षेत्र की बिसौली स्थित यदु और करीमगंज की राणा शुगर मिल को बहाना मिल गया है कि उनका सरकार पर बिजली का करोड़ों रुपया फंसा हुआ है। सरकार से भुगतान मिलने के बाद वे किसानों का भुगतान कर सकेंगी। हालांकि, शेखूपुर चीनी मिल बिजली उत्पादन नहीं करती।  जिले के गन्ना किसान सहकारी गन्ना संघ के जरिए निजी क्षेत्र की पांच और सहकारी क्षेत्र की एक चीनी मिल को गन्ने की सप्लाई करते हैं। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वादा किया था कि 25 अप्रैल तक चीनी मिलों से गन्ना किसानों का शत प्रतिशत भुगतान कराया जाएगा। इसके बावजूद गन्ना किसानों का तीन चीनी मिलों पर 32.71 करोड़ रुपया फंसा हुआ है। अब तक जिले के गन्ना किसानों को न्योली, रजपुरा और फरीदपुर चीनी मिलों ने ही शत प्रतिशत भुगतान किया है। हाल ही में किसानों को 7.12 करोड़ का भुगतान करने के बावजूद बिसौली की यदु शुगर मिल पर किसानों का अब भी 13.78 करोड़ 21 हजार और करीमगंज चीनी मिल पर किसानों का 2.54 करोड़ 32 हजार रुपया बकाया है। सहकारी क्षेत्र की शेखूपुर चीनी मिल पर भी गन्ना किसानों की 16.38 करोड़ 87 लाख रुपये की देनदारी है। शेखूपुर मिल को तो शासन से बजट का इंतजार है। वहीं यदु और राणा मिल पर किसानों की देनदारी सरकार और मिलों के बीच खींचतान में फंस गई है।  दरअसल, यदु और राणा शुगर मिलें बिजली का भी उत्पादन करती हैं। दोनों मिलों से सरकार बिजली खरीदती है। लंबे समय से सरकार ने मिलों के लिए बिजली का भुगतान नहीं किया है। दोनों गन्ना सहकारी संघ से नोटिस मिलने के बाद दोनों मिलें सरकार पर बिजली के बकाया का हवाला देकर पल्ला झाड़ रही हैं। मिलों का कहना है कि सरकार से बिजली का बकाया मिलने के बाद ही वे किसानों का भुगतान कर सकेंगी। ऐसे में किसानों के सामने भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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