उझानी (बदायूं)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) परिसर में निर्माणाधीन हाल का पिलर गिरने के मामले में कंपनी के कारिंदों के इशारे पर राजमिस्त्री ने शनिवार को एक और खेल कर डाला। क्षतिग्रस्त पिलर सीधा करके उसकी कुछ इस तरह मरम्मत कर दी गई, जिससे अब किसी को नहीं दिखेगा कि वह पहले कभी टूटा भी था। मरम्मत के बाद उसी पिलर के दोनों ओर दीवार की चिनाई भी शुरू कर दी गई है।
करीब 25 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन हाल का अधबना एक पिलर शुक्रवार सुबह बंदर के झकझोरने से गिर गया था। शनिवार सुबह राजमिस्त्री और मजदूर मौके पर पहुंचे तो पिलर देख कंपनी के प्रोजेक्ट इंजीनियर मुकेश वर्मा को अवगत कराया गया। बताते हैं कि प्रोजेक्ट इंजीनियर समेत कंपनी के कारिंदों ने मौके पर आकर हकीकत पर गौर करने की बजाय गिरे पिलर को ही ठीक कर देने के लिए कह दिया गया।
इसके बाद ही राजमिस्त्री ने सबसे पहले पिलर को सीधा किया, फिर सरियों को तार से बांध दिया गया। सीमेंट-बजरी के मिश्रण से उसके ऊपर प्लास्टर भी कर दिया गया है। पिलर चूंकि डीपीसी के ऊपर से बने हैं, इसलिए उनकी मजबूती पर सवाल भी उठाए जाने लगे हैं। जानकार बताते हैं कि निर्माण के दौरान पिलर अगर क्रेक भी हो जाए तो उसकी मरम्मत करने की बजाय फिर से नया बनाना चाहिए।
यह है पिलर का मानक
- नींव खोदकर फाउंडेशन से ही पिलर खड़ा किया जाना चाहिए।
- 12 एमएम की सरिया और छह-छह इंच की दूरी पर छल्ले ।
- फाउंडेशन के बाद पिलर की सरिया डीपीसी में फंसी हो।
- सीमेंट, बजरी और रोड़ी का मिश्रण तीन-एक के अनुपात में हो।
- पिलर पकने तक उस पर नियमित पानी का छिड़काव किया जाए।
(लोक निर्माण विभाग के जेई देवेंद्र पाल के अनुसार)
विभागीय अफसरों को पहले ही अवगत कराया जा चुका है। अफसर ही कार्यदायी संस्था या फिर एनएचएम के अफसरों से बात करेंगे। मैं खुद चाहता हूं कि निर्माण की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। ताकि निर्माण के बाद किसी अनहोनी की आशंका नहीं रहे। -डॉ. राजकुमार गंगवार, चिकित्साधीक्षक