बृहस्पतिवार को दिन भर चलती रही चर्चा, वरिष्ठ नेताओं ने साधी चुप्पी
पिछले चुनाव में सात नगर पालिकाओं में तीन पर जीती थी सपा
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। नगर निकाय चुनाव में इस बार समाजवादी पार्टी किसी को सिंबल नहीं देगी, इसकी चर्चा बृहस्पतिवार को पूरे जिले में चलती रही। हालांकि अभी पार्टी हाईकमान कुछ भी कहने को तैयार नहीं है, लेकिन पार्टी के तमाम नेताओं का कहना है कि यदि पार्टी ऐसा निर्णय लेती है तो इससे आने वाले समय में पार्टी को नुकसान हो सकता है।
पिछले नगर निकाय चुनाव में जिले में सपा का दबदबा रहा है। जिले की सात नगर पालिकाओं में पिछले चुनाव में सपा ने तीन सीटों पर जीत हासिल की थी। इसमें ककराला नगर पालिका से सपा की परवीन खां ने निर्दलीय चुनाव लड़े नजमुल जमा खां को हराया तो उझानी से पूनम अग्रवाल ने भाजपा के शंकर को शिकस्त दी। बिसौली से अबरार अहमद ने जीत हासिल की जबकि भाजपा की सरिता दूसरे स्थान पर रहीं।
नगर पंचायतों की बात करें तो अधिकांश में सपा के प्रत्याशी ही जीते थे। इस बार भी चुनाव में तमाम लोग अपनी तैयारी कर रहे हैं। भाजपा के बाद सपा ही ऐसी पार्टी है, जहां अध्यक्ष पद के लिए कई-कई दावेदार हैं। शहर सीट से भी तमाम लोग अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं तो अन्य पालिका तथा पंचायतों में भी दावेदारों की संख्या अच्छी खासी है। इधर, जब पार्टी के जिलाध्यक्ष आशीष यादव से इस संबंध में जानने को फोन किया गया तो उन्होंने गाड़ी में होने और आवाज न आने की बात कहकर फोन काट दिया। बाद में कई बार फोन मिलाने पर भी रिसीव नहीं हुआ। हालांकि मीडिया प्रभारी प्रभात अग्रवाल सिंबल न दिए जाने को अफवाह ही बता रहे हैं।
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अखिलेश से मिला नेताओं का प्रतिनिधिमंडल
- निकाय चुनाव में पार्टी जिले में सिंबल नहीं देगी, जब इसकी चर्चा आम हुई तो चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं में भी मायूसी फैल गई। इधर, पार्टी सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी मिला और चुनाव में सिंबल देने की मांग उठाई। बताते हैं कि इस प्रतिनिधिमंडल में कुछ पूर्व विधायक समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अभी इस मामले पर विचार करने को कहा है।
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सिंबल न मिले तो पार्टी को होगा नुकसान
- पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि पार्टी इस चुनाव में सिंबल नहीं देती है तो कार्यकर्ताओं को मायूसी होगी, जिसका असर आने वाले समय पर पार्टी पर जरूर पड़ेगा। आने वाले साल में लोकसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में पार्टी का कार्यकर्ता छिटककर दूसरी पार्टियों में भी जा सकता है। इन नेताओं का यह भी कहना है कि पार्टी के केवल कुछ गिनेचुने नेता ही नहीं चाहते कि जिले में सिंबल से चुनाव हों, जबकि अधिकांश नेताओं और कार्यकर्ता सिंबल देने के पक्ष में हैं।
...कहीं भाजपा को फायदा पहुंचाने की नीयत तो नहीं
- सपा सूत्रों के अनुसार, कुछ नेता जिले में लगातार सपा को कमजोर कर रहे हैं और अपना व्यक्तिगत स्वार्थ देख रहे हैं। कुछ नेता तो दबी जुबान यहां तक कहते हैं कि ये नेता लगातार हर चुनाव में भाजपा को फायदा पहुंचाने की नीयत से काम कर रहे हैं। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में भी जिले के बाहर का प्रत्याशी उतारकर भाजपा को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुंचाने का काम किया गया।
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