बिल्सी के जैन मंदिर में सिध्दचक्र विधान में हिस्सा लेते लोग। संवाद
बिल्सी। श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में बृहस्पतिवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तीसरे दिन छुल्लक श्री विशंक सागर महाराज व भरत सागर महाराज के सानिध्य में जैन समाज के लोगों ने 501 अर्घ्य समर्पित किए।
महाराज ने बताया कि सिद्धचक्र विधान में भक्ति और अध्यात्म का अनूठा संगम है। उनके अनुसार विधान में सिद्धों की श्रेणी में शामिल होने के लिए नियम, उपाय आदि बताए गए हैं। उनके गुणों का वर्णन भिन्न-भिन्न तरह से किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस अनुष्ठान में सिद्ध परमेष्ठी के गुणों की भक्ति के साथ-साथ 64 मंत्रो के माध्यम से 64 ऋषि धाम, 128 मंत्रों से पाप दहन विधान, 256 मंत्रों से कर्म दहन विधान, 512 मंत्रो से बृहद पंच परमेष्ठी विधान तथा 1024 मंत्रो से विधान करने का सौभाग्य सहज की मिल जाता है।
यहां विधान के साथ-साथ विश्व शाति महायज्ञ जाप्य मंत्र भी किया जा रहा है। इस मौके पर सार्थक जैन, दिव्या जैन, सीमा जैन, चुन्नी जैन, रेखा जैन, रीता जैन, इंदु जैन आदि मौजूद रहे। संवाद