ककराला में जुलूस में शामिल अकीदतमंद। संवाद
ककराला। बृहस्पतिवार को शुजाअती मियां के उर्स का आगाज फजर की नमाज और कुरानख्वानी से हुआ। बाद नमाज़ ए जुहर ज्यारत शरीफ से जुलूस ए परचम कुशाई का आगाज किया गया। जुलूस निर्धारित रास्तों जामा मस्जिद, हुसैन गली, खिलाड़ी वाली चौपाल, मेन बाज़ार से होता हुआ दरगाह शाह शुजाअत पर संपन्न हुआ।
जुलूस में मुंबई, झांसी, भोपाल, सूरत, दिल्ली, बरेली, मुरादाबाद, रामपुर, मालेगांव, बदायूं और ककराला के आसपास के गांव के लोगों ने शिरकत की। जुलूस में अकीदतमंदों ने जगह-जगह शरबत और खाना बांटा। जुलूस के बाद दरगाह शरीफ पर बाद नमाज़ ए असर हुज़ूर गाज़ी मियां सकलैनी उल कादरी ने फातिहा ख्वानी की। इसके बाद दूर-दराज़ से आए मेहमानों ने मज़ारे पाक पर हाज़िरी कर चादरपोशी व गुलपोशी की।
शाम को बाद नमाज़ ए इशा दरगाह शरीफ़ पर ही रिवायती अंदाज़ में एक शानदार रूहानी महफिल मुनाकिद की गई। इसमें शोरा इकराम ने अपने कलामों से समा बांधा। उलेमा इकराम ने सिलसिले के बुजुर्गों और साहिबे उर्स हज़रत शाह किबला शुजाअत अली मियां रहमतुल्लाह अलैह की तालीमात और आपकी शाने विलायत पर रोशनी डाली। उनके बताए गए रास्ते पर चलने की हिदायत की।
सूफी मौलाना रिफाकत सकलैनी नईमी ने कहा कि दीन के मुताबिक दुनिया वक्त गुजारे। दुनिया के मुताबिक दीन पर अमल न करें। मौलाना मुफ्ती फ़हीम सकलैनी ने कहा कि हर बुरे कामों से बचें। आखिर में सलात ओ सलाम हुआ। इसके बाद हुज़ूर गाज़ी मियां ने दुआ कराकर जलसे का इख्तिताम किया। जुलूस में सादिकैन मियां, मुंतखब मियां, अमीरूल उल्मा सूफ़ी मौलाना रिफाकत सकलैनी नईमी आदि मौजूद रहे।