समायोजन रद्द होने से आहत शिक्षामित्रों ने बृहस्पतिवार को कड़े तेवर दिखाते हुए जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रखा। इसके बाद मार्च निकालकर नौकरी बचाए रखने का रास्ता निकालने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। शिक्षामित्रों ने इस दौरान जोरदार प्रदर्शन भी किया। वहीं, समायोजन निरस्त होने के चलते जिले में बेसिक शिक्षा परिषद के सैकड़ों स्कूलों में तालाबंदी रही। इससे पढ़ाई प्रभावित हुई। धरना स्थल पर उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ महिला प्रकोष्ठ की महामंत्री लज्जावती ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद भी सभी रास्ते बंद नहीं हुए हैं। पैरा 26 के अधिकारों का उपयोग करते हुए राज्य सरकार पुन: भविष्य निर्धारण कर सकती है। महिला प्रकोष्ठ सचिव अनीता भारती ने कहा कि 48 घंटे बीत जाने के बाद भी सरकार के कान पर जूं नहीं रेंगी है, जो कहीं न कहीं हम लोगों को उग्र आंदोलन करने को मजबूर कर रही है। जिला मंत्री सीमा भारती ने कहा कि यदि सरकार समायोजित शिक्षकों के हित को देखते हुए शीघ्र कोई निर्णय नहीं लेती है तो उनका संगठन किसी भी हद तक जाने को मजबूर होगा। वहीं, आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष रावेंद्र सिंह, आशीष, वीरेंद्र कुमार, सतीश चंद्र गुप्ता ने भी विचार रखे। सभी शिक्षामित्रों ने जमकर नारेबाजी की।