बदायूं। दुश्मनों की सात गोलियों ने मोहित राठौर का सीना भेदा। शनिवार सुबह करीब आठ बजे उन्हें गांव में सलामी देकर आखिरी विदाई दी जाएगी। शनिवार देर शाम उनका पार्थिव शव बरेली एयरपोर्ट पर लाया गया। रविवार सुबह बरेली से सेना की यूनिट उनके गांव पहुंचेगी।
जवान के बहनोई उपेंद्र सिंह ने बताया कि शुक्रवार रात करीब दो बजे अचानक आतंकवादियों ने मोहित की टुकड़ी पर हमला कर दिया था। वहां आतंकवादी पहले से आकर आसपास झाड़ियों में छिप गए थे। पहले एक आतंकवादी उनके कैंप में अफसर की गर्दन काटने के लिए घुसा था लेकिन कुत्ते के भाैंकने से पीछे लौट गया। कुछ देर बाद दूसरे ने ग्रेनेड फेंका, जिससे सभी जवान अलर्ट हो गए। मोहित अपना असलहा लेकर निकल रहे थे। इसी दौरान उन्हें तीन गोलियां लगीं। वह जमीन पर गिर गए। सुबह छह बजे तक फायरिंग हुई। बाद में पता चला कि मोहित को सात गोलियां लगी थीं। उन्होंने बताया कि दोपहर के समय जम्मू में उनका पोस्टमार्टम कराया गया। उसके बाद उनका पार्थिव शरीर बरेली लाया गया। सुबह बरेली से सेना की यूनिट उन्हें गांव अपने साथ लेकर पहुंचेगी। सलामी देने के बाद उन्हें मुखाग्नि दी जाएगी।
बहनाेई बोले- रात के निशानेबाज थे मोहित, घातक प्लाटून में हुए थे शामिल
मोहित के बहनाेई उपेंद्र सिंह ने बताया कि हम दोनों लोग राजस्थान में तैनात थे। इसी साल जनवरी में मोहित जम्मू कश्मीर के जिला कुपवाड़ा जिले में 57 आरआर यूनिट में शामिल हो गए थे। उनकी 25 जुलाई को मोहित से बात हुई थी। तब उन्होंने बताया कि उनकी रात के समय फायरिंग अच्छी है, जिससे उन्हें घातक प्लाटून में शामिल कर लिया गया है। अब उन्हें 100 दिनों की नहीं बल्कि 120 दिन का अवकाश मिलेगा। उन्होंने कहा था कि वह नवंबर में गांव आएंगे।
मोहित कहता था हमेशा...दुश्मन से लूंगा मोर्चा, पीछे नहीं हटूंगा
मोहित की बहादुरी भरी बातें हमेशा जेहन में गूंजती रहेंगी। दोस्त, बहादुरी के किस्से सुनाना नहीं भूल रहे हैं। उन्होंने बताया कि मोहित हमेशा कहता था कि वह अपना, अपने गांव का और अपने देश का नाम ऊंचा रखेगा। अगर कभी दुश्मन से मोर्चा लेने का मौका आया तो पीछे नहीं हटेगा। ऐसा ही उसने कर दिखाया है। उसकी बलिदान सभी के लिए प्रेरक है।
मोहित 2017 में भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। उसके सेना में जाने के बाद गांव के कई युवाओं को सेना में जाने की प्रेरणा मिली। उसके दोस्त और तमाम युवा सेना जाने की तैयारी में जुटे। गांव के ही दुष्यंत, अजीत, स्वीटी और विपिन ने कहा कि मोहित उनसे कहता था कि बड़े भाग्य से किसी को देश की सेवा का अवसर मिलता है। उसे मिला है तो वह देश के लिए अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटेगा। जब शाम उसके वीरगति प्राप्त करने की जानकारी हमें मिली तो हम यही कह सके-मोहित जैसा तुम कहते थे, तुमने वैसा ही कर दिखाया है।
ऐसा है मोहित का गांव, मात्र 250 की आबादी सेना में हैं 12 नौजवान
मात्र 250 लोगों की आबादी के छोटे से गांव सभानगर में देशभक्ति का जज्बा भरा हुआ है। गांव के 12 नौजवान भारतीय सेना में सैनिक हैं। चार अग्निवीर हैंं। एक बीएसएफ में हैं। इस तरह से देश की रक्षा में गांव के परिवारों ने अपने लाल सौंप रखे हैं। देश के भीतरी हिस्सों में सेवा और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने के लिए तीन बेटियां पुलिस में हैं। गांव में पढ़ाई लिखाई का माहौल है। लोग बच्चों देश की सेवा और सरकारी सेवाओं में जाने के लिए प्रेरित करते हैं। गांव के तीस लोग सरकारी सेवाओं में हैं। इसमें एक ग्राम पंचायत अधिकारी भी हैं। संवाद