बदायूं। लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने प्रदेश की 51 सीटों के लिए प्रत्याशियों की पहली सूची जारी तो की, लेकिन बदायूं से अपने पत्ते नहीं खोले। वजह विपक्षी पार्टी की दमदार दावेदारी के साथ-साथ पार्टी के सात उम्मीदवारों के आवेदन को माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि बदायूं लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी का चेहरा चौंकाने वाला हो सकता है।
बदायूं और संभल लोकसभा सीट पर सीधा मुकाबला भाजपा और सपा के बीच होता आ रहा है। यादव-मुस्लिम बाहुल्य बदायूं सीट लंबे समय सपा का कब्जा रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की डॉ. संघमित्रा मौर्य ने धर्मेंद्र यादव को करीब 18 हजार वोट से हराकर सीट पर कब्जा कर लिया। इस चुनाव में कांग्रेस से मैदान में उतरे सपा के पूर्व सांसद सलीम शेरवानी भी 50 हजार से ज्यादा वोट ले गए थे। इस चुनाव में सलीम शेरवानी और पूर्व विधायक आबिद रजा के बागी तेवरों के बीच सपा ने धर्मेंद्र यादव का टिकट काटकर शिवपाल सिंह यादव को प्रत्याशी घोषित किया है।
आंवला सीट से धर्मेंद्र शाक्य, एटा से राजवीर सिंह, रामपुर से धनश्याम लोधे और संभल से परमेश्वरी सैनी को प्रत्याशी बनाकर पार्टी ने राजनीतिक गणित साधने की कोशिश की है। बदायूं लोकसभा सीट से प्रत्याशी घोषित करने से पहले भाजपा को यादव, ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय और मौर्य मतदाताओं को भी साधना है। बदायूं सीट से घोषित भाजपा प्रत्याशी आंवला, संभल, रामपुर और एटा सीटों के गणित को भी प्रभावित करेगा। आंवला लोकसभा क्षेत्र में बदायूं के शेखूपुर और दातागंज विधानसभा क्षेत्र आते हैं। बदायूं लोकसभा क्षेत्र में संभल का गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र शामिल है।
ये है वोटों का गणित
बदायूं लोकसभा क्षेत्र में बदायूं सदर समेत बिल्सी, बिसौली, सहसवान और संभल जिले का गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र आता है। लोकसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 3.5 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। यादव मतदाताओं की संख्या तीन लाख से अधिक है। मौर्य-शाक्य दो लाख, अनुसूचित जाति एक लाख आठ हजार, क्षत्रिय 1.30 लाख, वैश्य 1.40 लाख, ब्राह्मण 1.60 लाख, लोधे राजपूत 75, कश्यप 55, साहू 50, गड़िरिया 40 हजार और अन्य मतदाताओं की संख्या तीन लाख से अधिक है। ऐसे में बदायूं लोकसभा क्षेत्र में भाजपा को जातिगत गणित भी साधना होगा। इसके अलावा यादव-मुस्लिम मतदाताओं को भी एकमुश्त सपा के पक्ष में आने से रोकना होगा।
ये हैं टिकट के दावेदार
मौजूदा सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य, एमएलसी वागीश पाठक, पूर्व एमएलसी जितेंद्र यादव, पूर्व विधायक सिनोद शाक्य, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव और गुन्नौर के पूर्व विधायक अजीत यादव और पूर्व विधायक धर्मेंद्र शाक्य।
डॉ. संघमित्रा मौर्य के पिता स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा से 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा से बगावत कर सपा में शामिल हो गए थे। अब उन्होंने सपा से भी बगावत कर अपनी पार्टी बना ली है। पिता-पुत्री के संबंधों को लेकर जिले की राजनीति गरमाई रहती है। विधानसभा चुनाव के दौरान डॉ. संघमित्रा मौर्य की भूमिका को लेकर सवाल भी उठे थे।
अजीत यादव सपा, सिनोद शाक्य बसपा और फिर सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। एमएलसी चुनाव में सपा ने सिनोद शाक्य और भाजपा ने वागीश पाठक को प्रत्याशी बनाया था। सिनोद शाक्य ने ऐन मौके पर पर्चा वापस ले लिया और वागीश पाठक निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे।