बदायूं का राजकीय मेडिकल कॉलेज। संवाद
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बदायूं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 25 जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। उनके स्थान पर अब संविदा पर नई नियुक्तियां की जाएंगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जूनियर रेजीडेंट की एक और सीनियर रेजीडेंट की सेवाएं तीन वर्ष के लिए ली जाती हैं। इन जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की सेवा का एक वर्ष पूरा हो गया है। डॉक्टरों की कमी खलने से मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी।
मेडिकल कॉलेज में जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के 92 पद हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना तीन से चार हजार लोग आते हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण ओपीडी में लंबी कतारें लगी रहती हैं। शुक्रवार से ओपीडी में आने वाले मरीजों के सामने समस्या हो सकती है। ओपीडी में 25 डॉक्टरों की कमी के कारण ऐसा होगा। संविदा पर सेवाएं दे रहे इन डॉक्टरों की अब मेडिकल कॉलेज में सेवा नहीं ली जाएगी। इनके स्थान पर नए जूनियर रेजीडेंट को रखा जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि अभी मेडिकल कॉलेज को पांच नए जूनियर रेजीडेंट मिले हैं। जल्द और भी जूनियर व सीनियर रेजीडेंट मिल जाएंगे। दूसरी ओर निकाले गए डॉक्टरों में कॉलेज प्रशासन के प्रति रोष है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ डॉक्टरों ने बताया कि मनमाने ढंग से डॉक्टरों को निकाला और रखा जा रहा है।
पिछले दिनों भी करीब 20 डॉक्टरों को निकाल दिया गया था। बाद में कुछ ऐसे डॉक्टरों को भी सेवा विस्तार दे दिया गया, जो एक वर्ष पूरा कर चुके थे। हालांकि कॉलेज प्रशासन संविदा पर रखे गए डॉक्टरों की एक साल की सेवाएं ही होने का तर्क दे रहा है, लेकिन यदि इन डॉक्टरों की मानें तो कहीं न कहीं इसमें मनमाफिक काम करने की बात भी सामने आ रही है।
मेडिकल कॉलेज में जूनियर रेजीडेंट को एक वर्ष और सीनियर रेजीडेंट को तीन वर्ष के लिए रखा जाता है। इसमें सेवा समाप्त करने जैसी कोई बात नहीं है। जिन जूनियर रेजीडेंट ने एक वर्ष का समय पूरा कर लिया है, उनके स्थान पर दूसरों को मौका दिया जाएगा। -डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज