बदायूं। इस्लामनगर में हुए हादसे में जहां मां-बेटे की मलबे में दबकर मौत हो गई, वहीं दोनों बच्चियां काल के गाल से बचकर निकल आईं। उन्हें सुरक्षित देखकर हर कोई यही कह रहा है- जाको राखे साइयां मार सके न कोय। घटनास्थल को देखकर नहीं लगता था कि मकान के अंदर कोई बचा होगा। लोग यही कह रहे हैं कि दोनों बच्चियों को ऊपर वाले ने बचा लिया। अख्तर के रिश्तेदार तमन्ना और अर्फी को देखकर बोले- जब ऊपर वाला बचाता है तो जान पर आंच नहीं आती।
धूल-धुएं का गुबार छंटा तो नजर आई तमन्ना
हादसे के दौरान तीन साल की तमन्ना मकान की छत पर खेल रही थी। विस्फोट होने से मकान का पूरा लिंटर ढह गया था और लिंटर के साथ ही तमन्ना भी नीचे आ गई थी। गनीमत यह रही कि उसके ऊपर मलबा नहीं गिरा। वह गिरे मकान की छत पर ऐसे ही बैठी रोती रही। जब धूल-धुएं का छंटा तो तमन्ना ढहे मकान के लिंटर पर बैठी दिखाई दी। इसके बाद लोगों ने सबसे पहले उसे गोद में उठाया।
ऐसे बची अर्फी की जान
हादसे के दौरान अर्फी अपने घर में खिलौना कार से खेल रही थी। उस दौरान वह कार में ही बैठी थी। कार चलाकर दुकानों के पीछे रखे जनरेटर के नजदीक पहुंच गई थी। जनरेटर कार से ऊंचा था। जब धमाका हुआ तो मकान का लिंटर जनरेटर के ऊपर आ गिरा। कार जेनरेटर के नजदीक होने की वजह से सुरक्षित रही। हादसे के बाद जब लोग माैके पर एकत्र हुए तो उन्होंने जनरेटर के नजदीक मलबे में से अर्फी के रोने की आवाज सुनी तो उन्हाेंने लिंटर हटाकर उसे बाहर निकाला।