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भक्ति के रस में डूबे शिवभक्त, शिवालयों में भोले की जय जयकार

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सावन के पहले सोमवार को बिरुआबाड़ी मंदिर में जलाभिषेक करते शिवभक्त। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। सावन के पहले सोमवार को शहर के शिवालय हर-हर महादेव और बम-बम भोले की जयकार गूंजते रहे। तड़के से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रही। जिले के सभी शिव मंदिरों में दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुरक्षा की दृष्टि से मंदिरों के बाहर पुलिस भी तैनात रही।
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शिवभक्तों ने भगवान शिव का दूध, जल से अभिषेक किया और पुष्प, बेलपत्र, धतूरे से सजाकर आरती की। शहर के गौरीशंकर, बिरुआबाड़ी आदि मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। यहां भोले के दर्शन करने के लिए सुबह पांच बजे से ही लंबी लाइनें लग गईं जो दोपहर तक लगी रहीं।
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विशेष रूप से सजाए गए मंदिर
सावन पर पूजा और जलाभिषेक के मद्देनजर बिरुआबाड़ी मंदिर समेत अन्य मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया। फूलों के अलावा इलेक्ट्रिक झालरों का भी इस्तेमाल किया गया। बिरुआबाड़ी मंदिर में शिवलिंग की सजावट देखते ही बन रही है।
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दूध, दही, गंगाजल चढ़ाएं
पंडित गिरीश शर्मा कहते हैं कि सावन में भगवान शिव की पूजा से मनवांछित फल प्राप्त होता है। इस महीने में भगवान भोले शंकर को दूध, दही, घी, मक्खन, बेलपत्र, गंगाजल, आक, धतूरा आदि चढ़ाना चाहिए।
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अभिषेक का है महत्व
सावन में शिव के जलाभिषेक का विशेष महत्व है। मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग के पूजन से शिवजी का आशीर्वाद मिलता है। पं. गिरीश शर्मा के अनुसार समुद्र मंथन में निकले विष का पान करने के बाद जलन को शांत करने शिवजी का जलाभिषेक किया गया था, तब से यह परंपरा चली आ रही है। इसके साथ ही आक व बेलपत्र चढ़ाने से अनिष्ट ग्रहों की दशा भी शांत होती है। दूध में काले तिल मिलाकर अभिषेक करने से चंद्र संबंधित कष्ट दूर होते हैं।
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मंदिरों में नहीं दिखा कोविड प्रोटोकॉल का पालन
लगातार लोगों से एहतियात बरतने तथा कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा जा रहा है, लेकिन सावन के पहले सोमवार को जिले में कहीं पर भी कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन होता नहीं दिखाई दिया।

सावन के पहले सोमवार को बिरुआबाड़ी मंदिर में सजा शिवलिंग। संवाद- फोटो : BADAUN

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