डॉ. अवधेश पाठक ने कहा कि
आक्रोशित वर्तमान पीढ़ी की कितनी भव्यता निराली है
हाशिए में वर्णित खुशहाली बाकी संपूर्ण पृष्ठ खाली है
प्रवीन अग्रवाल ने सुनाया
टूट गई सब चूड़ी लाल, रोते रोते आंखे लाल
लाल लहू में रंग गए, देखो धरती मां के लाल
आशुतोष शर्मा ने कहा
खानों से निकाला करता था, कभी सुना था सच्चा हीरा
किंतु आज खानों से निकला खानों में इक खान कबीरा
डॉ. सतीशचंद्र शर्मा सुधांशु ने कहा
जैसे होते हैं गजल में काफिया रदीफ
वैसे ही ना पाक में पीएम श्री शरीफ
हरीश गुप्ता ने पढ़ा
संबंधों की कोशिश अच्छी, पर मोदी जी याद रहे
ऐसा न हो इस चक्कर में बस दुश्मन आबाद रहे।
इस मौके पर हरस्वरूप शर्मा, अमित कुमार, सुधीर शर्मा, दिव्यांशु शंखधार आदि मौजूद रहे।