उझानी अस्पताल के मेनगेट के पास उबड़- खाबड़ सड़क। संवाद
उझानी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर की सड़कें बीमार हो चुकी हैं...। वहीं मरीजों पर भी इसकी बदहाली की मार पड़ रही है। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं के सामने आ रही है। सुनीता ने बताया कि बहुत परेशानी से ओपीडी तक पहुंची हूं। कदम भी देख- देखकर आगे बढ़ाने पड़े। ऐसे में अगर कोई गर्भवती महिला फिसलकर गिर जाए तो गर्भस्थ समेत उसकी जान पर बन आएगी। अपने परिजनों के साथ बाइक और ई- रिक्शा से अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों को भी सुरक्षित निकलना मुश्किल हो रहा है। कमोबेश ऐसे ही हालात दूसरे गेट के पास हैं। बारिश होने पर चिकित्साधीक्षक कक्ष, दवा वितरण खिड़की और ओपीडी के आसपास घुटनों तक पानी भर जाता है। फिर भी परिसर की बीमार सड़कों के इलाज की जरूरत महसूस नहीं की गई है।
पालिका ने गोद लिया तो करा दी गई थी पथ प्रकाश व्यवस्था
- करीब चार साल पहले शासन की पहल पर नगर पालिका ने सरकारी अस्पताल गोद लिया था। इस सीएचसी का भी नंबर आया। पालिका की ओर से उस वक्त परिसर में पथ प्रकाश व्यवस्था और पेयजल की सुविधा बेहतर करा दी गई। चूंकि, अस्पताल परिसर की सड़कों के कायाकल्प को लाखों रुपये की दरकार थी, सो आगे की कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग के निर्माण अनुभाग में पैरवी कराने पर जोर दिया गया। इसके बाद विभागीय स्तर से इस पर गौर नहीं किया गया।
- अस्पताल परिसर में सड़कों की स्थिति काफी खराब है। वह मौखिक रूप से विभागीय अफसरों को अवगत करा चुके हैं। जल्द ही स्थानीय स्तर से प्रस्ताव तैयार कर सीएमओ के जरिये शासन को भेजा जाएगा। धनराशि अवमुक्त होने के बाद ही निर्माण कार्य होगा।- डाॅ. राजकुमार गंगवार, चिकित्साधीक्षक