मेवली के मेला मंदिर परिसर में श्रीकृष्ण कथा के सातवें दिन अतुल महाराज ने श्रोताओं को श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाकर भावविहोर कर दिया। कथावाचक ने कहा, गरीबी से तंग ब्राह्मण सुदामा का भिक्षा मांगकर भी गुजारा नहीं हो रहा था। एक दिन सुदामा की पत्नी ने उनसे बचपन के मित्र श्रीकृष्ण के दरबार में जाने की बात कही। पत्नी ने सुदामा को एक पोटली में चावल भगवान श्रीकृष्ण को देने के लिए देकर विदा किया। सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के दरवार में पहुंचे, तो फटेहाल कपड़ों में देखकर दरवान ने भगा दिया। दरवान से सुदामा ने कई बार प्रर्थना की, तो दरवान ने प्रभु श्रीकृष्ण को सुदामा के आने की सूचना दी। भगवान कृष्ण को जब सुदामा के आने की खबर मिली तो वह दौड़े चले आए। श्रीकृष्ण ने सुदामा को गले लगा लिया और अपने आंसुओं से उनके पैर धोए। मार्मिक कथा के इस अंश को सुनकर श्रोताओं की आंखें झलक आईं। प्रभु श्रीकृष्ण ने सुदामा से भाभी के चावल लेकर खाए और उनको विदा कर दिया। सुदामा विचलित थे कि मित्र ने कुछ भी नहीं दिया लेकिन सुदामा जब अपनी नगरी में पहुंचे, तो वहां झोपड़ी की जगह महल था। यह देखकर सुदामा के आश्चर्य की सीमा नहीं रही। आचार्य रामगोपाल शास्त्री, ठाकुरदास त्यागी, बालकदास त्यागी, भोले बाबा, झांझन सिंह, संजय सिंह, सतीश गुप्ता, अमित गुप्ता, कमल सिंह, बंटू गुप्ता, प्रमोद कुमार, दिनेश कुमार, गौरव कुमार सहित तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे।