परिवार वाले उसे दूसरे अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी मौत हो गई। आधी रात को परिवार वाले शव लेकर अस्पताल आए और वहां मौजूद दो कर्मचारियों की पिटाई कर दी और अस्पताल में तोड़फोड़ और लूटपाट की। अगले दिन सूचना पर पहुंचे एसीएमओ और नायब तहसीलदार ने अस्पताल सील कर दिया।
ये भी पढ़ें- UP: धीरेंद्र शास्त्री को मारने की धमकी देने के आरोपी अनस को मिली जमानत; सोशल मीडिया पर लिखा था ये मैसेज
महिला के परिजनों ने एफआईआर दर्ज करा दी। बाद में गौरव पटेल के खिलाफ बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चलाने के आरोप में धोखाधड़ी की एफआईआर भी दर्ज करा दी गई, जबकि रजिस्ट्रेशन 31 मार्च को खत्म होना था। अस्पताल सील होने की वजह से नवीनीकरण नहीं हो सका।
जांच की मांग कर रहे थे गौरव
गौरव लगातार सीएमओ से मामले की जांच कराने और अस्पताल बंद कराने की मांग रहे थे। उनका कहना था कि जब से अस्पताल सील हुआ था, तब से वह 30 हजार रुपये हर महीने किराया दे रहे हैं। इसलिए वह अस्पताल बंद करना चाह रहे थे, पर विभागीय अधिकारी उत्पीड़न कर रहे थे।
सोमवार शाम गौरव यही मांग करने सीएमओ कार्यालय पहुंचे थे। जब सीएमओ नहीं माने तो गौरव ने उन्हीं के सामने जहरीला पदार्थ खा लिया। गौरव की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।
सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने बताया कि युवक के अस्पताल में एक महिला की मौत हो गई थी। इस कारण अस्पताल को सील कर दिया गया था। अस्पताल संचालक के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराने की जानकारी मुझे नहीं है। अस्पताल को इसलिए सील किया गया था, क्योंकि उसका नवीनीकरण नहीं था।