चेकिंग के दौरान पकड़ी गई एंबुलेंस बनी ईको कार।स्रोत-एआरटीओ
बदायूं। यात्रीकर अधिकारी रमेश चंद्र प्रजापति ने मंगलवार सुबह डीएम के आदेश पर एंबुलेंस चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान किसी का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला तो किसी की फिटनेस नहीं थी। एक निजी कार को एंबुलेंस बनाकर चलाया जा रहा था। इस दौरान तीन एंबुलेंस को सीज कर दिया। उन पर 46 हजार रुपये का जुर्माना डाला गया है।
मंगलवार सुबह यात्रीकर अधिकारी राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उनके पहुंचने के दौरान मेडिकल कॉलेज के नजदीक चार एंबुलेंस खड़ी थीं। उन्होंने एक-एक करके उनके कागजात देखना शुरू किए तो एक एंबुलेंस का रजिस्ट्रेशन ही नहीं था। उसे बिना रजिस्ट्रेशन के ही दौड़ाया जा रहा था। दूसरी एंबुलेंस की फिटनेस नहीं थी।
तीसरी एंबुलेंस हरियाणा से खरीदी गई थी। उसकी वहां से एनओसी भी नहीं ली गई थी। चौथी एंबुलेंस ऐसी पकड़ी गई जो वास्तव में एंबुलेंस ही नहीं थी। वह हकीकत में निजी कार थी। उसे एंबुलेंस बनाकर चलाया जा रहा था। चालक ने कार के ऊपर एंबुलेंस लिखवा रखा था। इनमें मानक के अनुसार कोई फार्मासिस्ट भी नहीं था। एक-एक ऑक्सीजन सिलिंडर लगा रखा था और उनमें स्ट्रेचर था।
इसके अलावा कोई सुविधाएं नहीं थी। इससे यात्रीकर अधिकारी ने सभी को सीज कर दिया और सभी पर 45 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यात्रीकर अधिकारी ने बताया कि किसी एंबुलेंस के कागजात पूरे नहीं मिले। सभी एंबुलेंस डग्गामारी में चलाई जा रहीं थीं। इससे उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।