कादरचौक। रेवा गांव में एक ग्रामीण की एक के बाद एक 13 भैंस मर गईं। इनमें 12 को जिलास्तर पर पोस्टमार्टम कराया गया। इसमें भैंसों में कोई बीमारी नहीं बताई गई। जबकि इनमें से एक भैंस का पोस्टमार्टम बरेली आईवीआरआई में कराया तो निमोनिया और गलाघोंटू बीमारी के कारण मौत होना पाया। ऐसे में बदायूं में किए गए पोस्टमार्टम व जिलास्तरीय टीम पर सवाल उठ रहे हैं।
रेवा में आठ अगस्त तक 13 भैंसों की मौत हो गई थी। इतनी बड़ी संख्या में भैंसों के मरने की खबर पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद कुमार ने एक भैंस का पोस्टमार्टम कराया। जिलास्तर पर आयी रिपोर्ट के अनुसार भैंस में निमोनिया और गला घोंटू के लक्षण नहीं मिले। ऐसे में पशुपालक दो बीमार भैंस को भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली ले गए। वहां पर एक भैंस की मौत हो गई। उसका वहीं पोस्टमार्टम किया गया।
लौटे समय दूसरी भी भैंस मर गई। कादरचौक में तैनात पशु चिकित्सक नेमपाल गंगवार ने बताया कि जिलास्तर पर जो पोस्टमार्टम हुआ है। उसमें कोई भी बीमारी नहीं आयी है। जबकि बरेली आईवीआरआई की जो रिपोर्ट आयी है। उसमें भैंस को निमोनिया और गलघोंटू की बीमारी पायी गई है। ऐसे में जिला स्तर पर किए गए पोस्टमार्टम पर सवालियां निशान उठ रहे हैं।