बदायूं। दानपुर चौकी इंचार्ज धर्मवीर सिंह को शुक्रवार को जेल भेजा गया। उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे की विवेचना एंटी करप्शन टीम करेगी। पकड़े जाने से पहले चौकी इंचार्ज को यह तक भरोसा नहीं था कि वह पूरे 10 हजार रुपये लाया होगा। चौकी इंचार्ज ने रुपये गिनने के बाद ही आरोपित को बाहर जाने दिया था। वह एक सिपाही के साथ मिलकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा था।
जरीफनगर थाना क्षेत्र का दानपुर चौकी इंचार्ज कादरचौक थाने की तरह एक सिपाही के साथ मिलकर शिकायती पत्रों पर वसूली कर रहा था। हालांकि इस मामले में उस सिपाही का नाम सामने नहीं आया है। लेकिन यह बताया जा रहा है कि चौकी इंचार्ज आठ जुलाई को सिपाही के साथ आरोपित मनोज कुमार के घर गया था।
तब उसने यह बताया था कि मनोज और उसके भाई के खिलाफ एक शिकायती पत्र आया है। वह सीओ सहसवान के यहां जाकर अपने बयान दर्ज कराएं। दूसरे दिन नौ जुलाई को मनोज कई लोगों के साथ सीओ सहसवान के कार्यालय पहुंचा और अपने बयान दर्ज कराए। वह सहसवान से लौट रहा था तभी चौकी इंचार्ज की कॉल आई और बोला कि वह शाम को चौकी पर आए। उसकी समस्या का समाधान किया जाएगा। शाम को मनोज चौकी पर पहुंचा था। तब सिपाही भी चौकी पर मौजूद था।
उससे चौकी इंचार्ज ने कहा था कि अगर वह 20 हजार रुपये देगा तो उसका सामान्य धाराओं में चालान कर देगा। उसकी बाहर से जमानत हो जाएगी। मनोज को इतना हड़काया था कि वह रुपये देने को तैयार हो गया। उसने रुपये देने से पहले एंटी करप्शन टीम को सूचना दे दी थी, जिससे टीम ने 11 जुलाई को दानपुर पुलिस चौकी के आसपास घेराबंदी कर दी।
मनोज का कहना है कि चौकी इंचार्ज इतना लालची था कि वह रुपये लेते समय यह कह रहा था कि पहले मैं रुपये गिन लूं उसके बाद ही बाहर जाना। उसने रुपये गिनने के बाद ही उसे बाहर जाने दिया था। उसके बाद एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। शुक्रवार दोपहर उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
आयकर विभाग की टीम समझकर बंद हो गया था बाजार
- दानपुर पुलिस चौकी दूसरी मंजिल पर बनी है। उसके आसपास काफी बड़ा बाजार है। जिस दौरान एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ा था। उस वक्त बाजार में अफवाह यह उड़ गई कि आयकर विभाग की टीम आ गई है, जिससे बाजार की सभी दुकानें बंद हो गई। जब बाद में लोगों को पता चला कि वह आयकर विभाग की टीम नहीं एंटी करप्शन टीम थी। तब कहीं बाजार की दुकानें खुलीं।