अमन मयंक शर्मा ने पढ़ा कि
जो हो गए देश पर जां निसार
उन्हें हर हिंदुस्तानी को याद रखना पड़ेगा।
नरेश परौलवी ने कहा कि
हाथ में जयचंद के अब देश का इतिहास है
यह हकीकत है, इसे समझो न तुम परिहास है
इस दौरान संरक्षक दिनेशचंद्र शर्मा, गौरव पाठक, अचिन मासूम, संजय सक्सेना, आदर्श कुमार, सोनाली सक्सेना, आजाद शर्मा आदि ने काव्यपाठ किया। इस मौके पर सुरेश कुमार, निहार रंजन, अलीशा, मोहित राय, अंजलि शंखधार आदि मौजूद रहे।