पूर्णाहुति के साथ सिद्धिदात्री का हुआ
व्रत करने वाले कन्या भोज के बाद व्रत पारायण करते हैं। जो भक्त नवरात्र का पूरा उपवास कर रहे थे या जो पहला और अंतिम उपवास रखे थे। सभी ने व्रत का पारायण किया। अष्टमी से नवमी तक हवन-पूजन के साथ कन्या भोज के आयोजन होते रहे। जो पूरे नवरात्र व्रत नहीं रख पाते वह प्रथम नवरात्र पर शैल पुत्री की पूजा और व्रत कर सप्तमी, अष्टमी या नवमी में से किसी एक दिन उपवास कर देवी मां की कृपा प्राप्त कर लेते हैं। उपवास कर पूजा अर्चना करने से देवी मां प्रसन्न होती हैं और मनोकामना पूरी करती हैं। शहर में नगला देवी मंदिर पर भारी भीड़ रही। कचहरी रोड देवी मंदिर के अलावा देवी मठिया चौबे मोहल्ला में पूजा अर्चना और हवन पूजन शुरू हो गए हैं। वहीं अन्य मंदिरों में भी मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा अर्चना का क्रम जारी है, जो नवमी तक जारी रहेगा। नवमी को देवी मठों और मंदिरों में पूजा के लिए सुबह से लंबी कतारें लगी रहीं।