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Ustad Rashid Khan: काहे उजाड़ी मोरी नींद... गाकर लोगों के दिल में बसे, अब उदास कर छोड़ गए दुनिया

Wed, 10 Jan 2024 03:12 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

उस्ताद राशिद खान मूल रूप से बदायूं के कबूलपुरा के निवासी थे। यहां उनका पैतृक आवास है और यहीं उनका जन्म हुआ। राशिद खान के नाना सहसवान-रामपुर घराने के पद्मभूषण उस्ताद निसार हुसैन खान थे। इन्हीं से उन्होंने छह साल की उम्र में संगीत की शिक्षा ली।
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बदायूं स्थित उस्ताद राशिद खान का घर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सहसवान-रामपुर घराने के शास्त्रीय गायक बदायूं के मूल निवासी उस्ताद राशिद खान (55) के कोलकाता में निधन की खबर सुनकर यहां संगीत प्रेमियों  को उदास कर गए। वह करीब 40 साल पहले कोलकाता जाकर बस जरूर गए थे, मगर यहां के अपने चाहने  वालों से कभी दूर नहीं हुए। अचानक दुनिया से रुखसत होने से उनके मुरीद उदास हैं। 

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उस्ताद राशिद खान मूल रूप से बदायूं के कबूलपुरा के निवासी थे। यहां उनका पैतृक आवास है और यहीं उनका जन्म हुआ। राशिद खान के नाना सहसवान-रामपुर घराने के पद्मभूषण उस्ताद निसार हुसैन खान थे। इन्हीं से उन्होंने छह साल की उम्र में संगीत की शिक्षा ली।

करीब 10 साल की उम्र में ही वह उस्ताद निसार खान के साथ कोलकाता चले गए थे और वहीं आईटीसी संगीत रिसर्च अकादमी में संगीत की तालीम ली। राशिद खान की गिनती देश के प्रमुख गायकों के रूप में की जाती थी। उन्हें साल 2006 में पद्मश्री तो साल 2022 में पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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उनके फुफेरे भाई दानिश हुसैन ने उनके निधन की जानकारी देते हुए बताया कि उस्ताद राशिद खान संगीत के लिए समर्पित थे। बदायूं से जब कोई कोलकाता पहुंचता था तो वह उसका बहुत सम्मान करते थे। यहां जब भी आते थे तो पूरे मुहल्ले के लोगों से मुलाकात करते थे और कलाकारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते थे।

 

कई हिंदी और बांग्ला फिल्मों के लिए गाए गीत
बदायूं। उस्ताद राशिद हुसैन खान ने बॉलीवुड की कई फिल्मों में गाने गाए। उनके प्रसिद्ध गानों में करीना कपूर और शाहिद कपूर की फिल्म ‘जब वी मेट’ का ‘आओगे जब तुम ओ साजना’ काफी लोकप्रिय हुआ। इसके अलावा उन्होंने विवेक ओबराय अभिनीत फिल्म ‘किसना : द वॉरियर पोएट’ के गाने ‘काहे उजाड़ी मोरी नींद’ और शाहरुख खान की फिल्म ‘माई नेम इज खान’ का ‘अल्लाह ही रहम गीत’ भी गाया था। 

इसके अलावा करीब एक दर्जन बांग्ला फिल्मों में भी उन्होंने गीत गाए। उस्ताद राशिद खान ने अपने चाचा ग्वालियर घराने के उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान से भी प्रशिक्षण लिया था। पद्मश्री और पद्मभूषण के अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड और फिल्म फेयर पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। 
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तालिब सुल्तानी म्यूजिक अकादमी ने जताया शोक
उस्ताद तालिब सुल्तानी म्यूजिक अकादमी द्वारा पद्मभूषण उस्ताद राशिद खान के इंतकाल पर खिराजे अकीदत पेश की गई। सदस्य दानिश बदायूंनी ने कहा कि हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया के संगीत को राशिद के जाने से जो क्षति पहुंची है उसे पूरा नहीं किया जा सकता। आज संगीत के एक युग का अंत हो गया है। 

उनके निधन से सहसवान रामपुर घराने को भी बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। आमिर सुल्तानी ने कहा कि उनके जाने से बदायूं को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। वह हमारे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस मौके पर नितिन गुप्ता, नदीम चौधरी, शाहबाज हुसैन, अंबर शब्बीर, गुड्डू अली, राहुल गुप्ता आदि मौजूद रहे। 
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