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Budaun News: ऑक्सीजन प्लांट की थमी सांसें, पत्राचार कर की जा रही इलाज की व्यवस्था

Sun, 16 Jun 2024 04:08 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
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जिला अस्पताल में लगा ऑक्सीजन प्लांट।संवाद
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बदायूं। कोरोना काल में शासन ने जिला अस्पताल में 93 लाख रुपये का ऑक्सीजन प्लांट लगाया था, जो अब चार माह से बंद पड़ा है। प्लांट की पाइप लाइन से मरीजों को ऑक्सीजन नहीं दी जाती है, ऐसे में सिर्फ सिलिंडर लगाकर ही काम चलाया जा रहा है। इसमें कई मरीज देरी का खामियाजा भी भुगत रहे हैं। वहीं, सीएमएस का कहना है कि प्लांट को ठीक करने के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है, इंजीनियर भी आए थे। लेकिन, अभी तक पूर्ण तरीके से प्लांट सुचारु नहीं हो पाया है, जल्द ही इसे ठीक कराया जाएगा।
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जिला अस्पताल में रोजाना करीब एक हजार से अधिक मरीज आते हैं। अस्पताल में करीब आठ से 10 मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत रहती है। पिछले चार माह से ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने पर सिलिंडर और कंसंट्रेटर से आपूर्ति की जा रही है। यह ऑक्सीजन प्लांट कोरोना की दूसरी लहर में तैयार हुआ था, तब यह उम्मीद थी कि अब सिलिंडर से ऑक्सीजन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने बिना किसी प्रशिक्षण के चार महीने तक इसे संचालित किया, जब कमी आई तो आपूर्ति बाधित होने लगी। क्या कमी आई, इसके विषय में कर्मचारियों को भी जानकारी नहीं है, क्योंकि उन्हें इसके संचालन का सामान्य प्रशिक्षण भी नहीं मिला था।
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कर्मचारी नहीं लाए ऑक्सीजन सिलिंडर
वार्ड में भर्ती मरीज रामबेटी के बेटे संजू ने बताया कि सांस की दिक्कत होने पर मां को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। शुक्रवार की रात को उनकी हालत बिगड़ी तो डॉक्टर मौजूद नहीं थे। मरीज को ऑक्सीजन की आवश्यकता थी। मौजूद स्टाफ को दिखाया तो बताया कि ऑक्सीजन लगानी होगी। कर्मचारी ऑक्सीजन सिलिंडर ही नहीं लाए तो मां को निजी अस्पताल में ले गए।
ऑक्सीजन सिलिंडर लाने में हो रही देरी

जरीफनगर क्षेत्र से आए बहादुर ने बताया कि शनिवार दोपहर 12 बजे पिता को लेकर अस्पताल आए। डॉक्टरों ने बमुश्किल तो भर्ती किया। उनको सांस में दिक्कत थी। ऑक्सीजन की आवश्यकता थी, जिस पर स्टाफ ने कर्मचारी से ऑक्सीजन लगाने को कहा। करीब दो घंटे मरीज बेड पर तड़पा तब कहीं जाकर ऑक्सीजन सिलिंडर कर्मचारी लेकर आए।
ऐसे काम करता है प्लांट
प्लांट में ऑक्सीजन लिक्विड फाॅर्म तैयार होती है। जिसे 10,000 लीटर की क्षमता वाले टैंक में स्टोर किया जाता है। मरीजों तक ऑक्सीजन की सप्लाई पहुंचाने को पाइपलाइन बिछी हुई है। टैंक खाली होने पर फिर से प्लांट के जरिए इसे भरा जाता है।
प्लांट लगाए पर नहीं मिले ऑपरेटर
तीन साल पहले जिला अस्पताल समेत जिले में पांच ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। इन प्लांटों को चलाने के लिए ऑपरेटर तक नहीं मिल सके हैं। यही कारण है कि जिले के सभी ऑक्सीजन प्लांट अक्सर खराब रहते हैं।

ऑक्सीजन प्लांट खराब है। प्लांट सही कराने के लिए शासन को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। हालांकि, अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर और कंसंट्रेटर की कमी नहीं है। इंजीनियर आए और ठीक भी किया, लेकिन सही से अभी प्लांट चल नहीं रहा है। इंजीनियर को फिर से बुलाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस
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