रमजान के आखिरी अशरा में अहतकाफ में बैठना यानि मस्जिद में पूरे दस दिन केवल अल्लाह की इबादत करना खुदाई आफतों से निजात का कारण बनता है।
अहतकाफ में बैठने से पहले हाजी बाबा खानकाह मस्जिद के इमाम हाफिज अब्दुल मुक्तदिर अहमद ने कहा कि इंसानों के बुरे अमालो, शैतान की पैरवी और अल्लाह के हुक्म और उसके रसूल की सुन्नत, हदीसों के खिलाफ चलने से खुदा की आफत नाजिल होती है। जैसे जलजला, बाढ़, बीमारियां, आंधी-तूफान इन तमाम आफतों से बचने के लिए अहतकाफ में बैठकर कम बोलना, कम खाना, कम सोना, सिर्फ अल्लाह की इबादत और अल्लाह से तमाम उम्मतें रसूल के लिए दुआ करना ही रब को राजी कर सकता है। खानकाह प्रबंधक अनवार अहमद सैफी नन्हें मियां ने बताया अकीदतमंदों के लिए खानकाह में इबादत करने का विशेष इंतजाम किया गया है। 21 रमजान को इफ्तार, लंगर, के अलावा रात में इबादत और 27 वी रमजान की रात में नमाज और दुआ होगी। सहरी का इंतजाम भी रहेगा। अहतकाफ से पहले नात पाक और दुआ हुई। इस मौके पर मशकूर खां, हाफिज अब्दुल कदीर, गुलाम मोहम्मद, छोटू फारूकी, हमदम बिसौलबी, राजा फिरोज खां, कमरूददीन नियाजी, मुस्तफा हैदर अददा, काजी जहीर अहमद, मुजीब सलमानी, फितरत आदि मौजूद रहे।