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Budaun News: सीओ, दो इंस्पेक्टर और भाजपा नेता पर दर्ज होगा हत्या का मुकदमा, कोर्ट ने दिया आदेश; ये है मामला

Fri, 26 Jul 2024 01:35 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

बदायूं के जरीफनगर थाना क्षेत्र में दिसंबर 2018 में हरी सिंह नाम के व्यक्ति का शव मिला था। उसके भाई ने आरोप लगाया कि पुलिस की पिटाई से हरी सिंह की मौत हुई थी। इसके बाद शव फेंक दिया। हत्या के मामले में कार्रवाई के लिए वह अधिकारियों के चक्कर लगाता रहा। जब सुनवाई नहीं हुई तो उसने कोर्ट की शरण ली। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बदायूं में कोर्ट ने बिल्सी के तत्कालीन सीओ नासिर, उघैती थाना के इंस्पेक्टर ललित भाटी, जरीफनगर के तत्कालीन एसओ पंकज लवानिया और उघैती क्षेत्र के भाजपा नेता पुरुषोत्तम टाटा के खिलाफ हत्या की धारा में रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है।

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गांव महानगर निवासी हरी सिंह उर्फ हरिया की पुलिस की पिटाई के दौरान 29 दिसंबर 2018 को मौत होने के बाद शव को जरीफनगर थाना क्षेत्र के सूरजपुर दानपुर के बीच हाईवे पर फेंक दिया गया था। हरिया के भाई लाल सिंह ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।  सीजेएम तौसीफ रजा ने 156 (3) में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिए हैं। अब चारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस विवेचना करेगी। कोर्ट ने चारों लोगों के खिलाफ हत्या की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं।

यह था मामला
कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में लाल सिंह ने बताया कि उघैती में 21 दिसंबर 2018 को बाइक सवार चार बदमाशों ने होमगार्ड छत्रपाल (36) को गोली मार दी थी, जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई थी।  घटना का पता लगने पर पुलिस के आलाधिकारी पहुंच गए थे। सीओ इरफान नासिर ने मौका मुआयना किया। होमगार्ड छत्रपाल हजरतपुर थाना क्षेत्र के करियामई गांव के रहने वाले थे। 

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इस मामले में तत्कालीन एसओ उघैती ने क्षेत्र के 32 लोगों को पकड़ कर थाने में लाकर बैठा लिया। अधिकारियों का आदेश था कि चार दिन में घटना का खुलासा किया जाना है। थाना पुलिस ने हरी सिंह उर्फ हरिया को 22 दिसंबर 2018 को गिरफ्तार कर लिया। थाने लाकर उसके साथ मारपीट की। सबसे अधिक शक उस पर था, क्योंकि उस पर करीब इस तरह के 15 से अधिक केस पंजीकृत थे। पुलिस की पिटाई से हरी सिंह बेहोश हो गया और उसकी मौत हो गई। 

पुलिस ने अपना बचाव करने के लिए उसके शव को जरीफनगर थाना क्षेत्र में फेंक दिया। पुलिस ने हरी सिंह को थाने से भाग जाना बताया था। जब उसका शव जरीफनगर थाना क्षेत्र में मिला तो पुलिस पर हत्या का आरोप लगा। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहरीला पदार्थ खाने से मौत की पुष्टि हुई। पुलिस ने थाने से भागकर जेल जाने से बचने को जहर खाने का मामला दर्ज किया था। इसके बाद हरी सिंह की हत्या में कार्रवाई के लिए वह अधिकारियों के चक्कर लगाता रहा। जब हार गया तो उसने कोर्ट का सहारा लिया।
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