इस मामले में तत्कालीन एसओ उघैती ने क्षेत्र के 32 लोगों को पकड़ कर थाने में लाकर बैठा लिया। अधिकारियों का आदेश था कि चार दिन में घटना का खुलासा किया जाना है। थाना पुलिस ने हरी सिंह उर्फ हरिया को 22 दिसंबर 2018 को गिरफ्तार कर लिया। थाने लाकर उसके साथ मारपीट की। सबसे अधिक शक उस पर था, क्योंकि उस पर करीब इस तरह के 15 से अधिक केस पंजीकृत थे। पुलिस की पिटाई से हरी सिंह बेहोश हो गया और उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने अपना बचाव करने के लिए उसके शव को जरीफनगर थाना क्षेत्र में फेंक दिया। पुलिस ने हरी सिंह को थाने से भाग जाना बताया था। जब उसका शव जरीफनगर थाना क्षेत्र में मिला तो पुलिस पर हत्या का आरोप लगा। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहरीला पदार्थ खाने से मौत की पुष्टि हुई। पुलिस ने थाने से भागकर जेल जाने से बचने को जहर खाने का मामला दर्ज किया था। इसके बाद हरी सिंह की हत्या में कार्रवाई के लिए वह अधिकारियों के चक्कर लगाता रहा। जब हार गया तो उसने कोर्ट का सहारा लिया।