बदायूं। तीन साल पहले अनियंत्रित होकर दूध भरा कैंटर पेड़ से टकरा गया था। जिसमें वाहन का एक हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसकी सूचना बीमा कंपनी को दी जिस पर सर्वेअर ने मौके पर आकर सर्वे करते हुए रिपोर्ट कंपनी को भेजी लेकिन कंपनी ने रिपोर्ट निरस्त करते हुए बीमा राशि देने से इन्कार कर दिया। पीड़ित ने जिला उपभोक्ता फार्म का दरवाजा खटखटाया। तो मामले की सुनवाई के बाद फोरम ने बीमा कंपनी ने दो माह में बीमा राशि के भुगतान के आदेश दिए हैं।
कासगंज के थाना सहावर क्षेत्र के गांव चेत्तर नगला निवासी शिशुपाल पुत्र शिवलाल ने कोर्ट में दी अर्जी में बताया है कि उसने आयशर कंपनी का एक कैंटर सात साल पहले खरीदा था। उसने दूध के काम पर अपना कैंटर लगा दिया। वहीं बीमा कंपनी से बीमा कराया गया। 17 मई को वह अल्फा फैक्ट्री हाथरस दूध लेकर जा रहा था । उसके साथ हैल्पर विजेंद्र पाल और दूध लोड़ करने वाला प्रदीप मौजूद था।
उझानी कोतवाली क्षेत्र के गांव बुटला के पास कैंटर अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गया था। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ आते देख वह वाहन छोड़कर मौके से भाग गया था। वहीं हेल्पर विजेंद्र और प्रदीप घायल हो गए थे। जिनको जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। हादसे के बाद बीमा कंपनी को घटना से अवगत कराया गया।
इस पर कंपनी से सर्वेयर ने मौके पर आकर सर्वे की और रिपोर्ट बीमा कंपनी को सौंप दी। कंपनी ने सर्वे में दी गई 7.85 लाख की रकम देने से इंकार करते हुए सर्वे को निरस्त कर दिया। इस पर वाहन स्वामी ने जिला उपभोक्ता फार्म का वाद दायर किया। जिसकी सुनवाई के बाद फोरम ने बीमा कंपनी को दो माह राशि के भुगतान का आदेश दिया।