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Budaun News: जो पार्टी पुरानी पेंशन बहाल कराएगी... वही समर्थन पाएगी

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प्रेमानंद शर्मा।
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बदायूं। बुढ़ापे की लाठी पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर कर्मचारी- शिक्षक लंबे अरसे से आंदोलन की राह पर हैं। विधानसभा चुनाव में भी कर्मचारी-शिक्षकों ने इसे मुद्दा बनाया था। कुछ राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन करते हुए सत्ता में आने पर बहाली का आश्वासन भी दिया था, लेकिन सत्ता में भाजपा की वापसी से मामला लटक गया।
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अब लोकसभा चुनाव में भी कर्मचारी-शिक्षकों ने इसे मुद्दा बनाते हुए एलान किया है कि जो उनकी यह मांग पूरी करेगा, कर्मचारी चुनाव में उसी राजनीतिक दल का साथ देंगे। जाहिर है कि राजनीतिक दल शिक्षक-कर्मचारियों का समर्थन हासिल करने के लिए अपने चुनावी एजेंडे में पुरानी पेंशन बहाली का एलान कर सकते हैं। कर्मचारियों के प्रांतीय नेता रहे कवि माधव मिश्र ने पुरानी पेंशन को लेकर कर्मचारियों से सोमवार को वर्चुअल संवाद किया। कहा, वह पुरानी पेंशन के मुद्दे को चुनाव में उठाएंगे। कर्मचारी वोट मांगने आने वाले उम्मीदवारों से भी पूछेंगे कि पुरानी पेंशन दिलाएंगे या नहीं।




जो भी पार्टी पुरानी पेंशन बहाल करने के मुद्दे को अपने एजेंडे में शामिल करेगी, उसी पार्टी को कर्मचारी पूरी ताकत से जिताने में जुटेंगे। पुरानी पेंशन सभी कर्मचारियों का हक है, इसे हासिल करके ही रहेंगे। - प्रदीप चतुर्वेदी, अध्यक्ष डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन बदायूं
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लोकसभा चुनाव में शिक्षकों का मुख्य मुद्दा पुरानी पेंशन के साथ-साथ टेबलेट व डिजिटलाइजेशन है। जो प्रत्याशी शिक्षक हित में काम करेगा, वही शिक्षक बिरादरी का वोट पाने का हकदार होगा। - प्रेमानंद शर्मा, जिलाध्यक्ष उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ



- शिक्षक हों या कर्मचारी, पूरी जिंदगी काम करने के बाद जब सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होते हैं तो पेंशन ही उनका मुख्य सहारा होती है। सरकार ने कर्मचारियों से उनके बुढ़ापे का सहारा छीन लिया है। जो भी पार्टी पुरानी पेंशन बहाली का भरोसा देगी, उसे ही शिक्षकों का समर्थन मिलेगा। - अरुण पांडे, जिलाध्यक्ष उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ


- सभी कर्मचारियों व शिक्षक समाज के हित में नई पेंशन व्यवस्था समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू होनी चाहिए। सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से यह उचित है और आवश्यक भी है।-राजेश कुमार जौहरी, प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष स्वायत्त शासन कर्मचारी महासंघ

-पेंशन ही कर्मचारी के जीवन का मात्र एक सहारा है। जो पार्टी पेंशन की बात अपने एजेंडे में रखकर पेंशन दिलाएगी, उसे ही कर्मचारी समाज का समर्थन हासिल होगा। अन्यथा लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा। - रामप्रकाश गुप्ता, पूर्व अवर अभियंता

- सेवानिवृत्ति के बाद एक कर्मचारी को पेंशन उतनी ही जरूरी है, जितनी भारतवर्ष के प्रत्येक नागरिक को अयोध्या में श्रीराम का मंदिर। कर्मचारी को पराधीनता का जीवन न जीना पड़े, ताकि राम नाम की सत्यता के तक सफर में उसका सम्मान और स्वाभिमान बना रहे। - रविंद्र बाबू सक्सेना, सेवानिवृत्त जिलेदार सिंचाई विभाग बिसौली
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प्रेमानंद शर्मा।

प्रेमानंद शर्मा।

प्रेमानंद शर्मा।

प्रेमानंद शर्मा।

प्रेमानंद शर्मा।

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