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Budaun News: अब बारिश बढ़ाएगी मलेरिया का खतरा

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जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की लाइन। संवाद
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हीट स्ट्रोक का खतरा कम हुआ तो मलेरिया फैलने की आशंका बढ़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। अब तक लगातार बढ़ रहे तापमान के साथ चल रही लू से हीट स्ट्रोक का खतरा बना हुआ था। अब दो दिन से हो रही बारिश और बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट आई है तो हीटस्ट्रोक का खतरा तो कम हुआ है, लेकिन बारिश की वजह से मच्छर पैदा होने से मलेरिया का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में मलेरिया विभाग ने अलर्ट भी जारी किया है।
पिछले कुछ दिनों से तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही थी। तापमान भी 45 डिग्री के आसपास पहुंच गया था, ऐसे में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा तो कई मरीजों में हीट स्ट्रोक के लक्षण भी मिले। हीट स्ट्रोक को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क हुआ और सरकारी अस्पतालों में इंतजाम दुरुस्त कराए गए। वहां कूल वार्ड बनाए गए, ताकि हीट स्ट्रोक पीड़ितों को उन वार्डों में भर्ती कर सही से इलाज किया जा सके। सरकार भी हीट स्ट्रोक को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दे रही थी।
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मंगलवार की सुबह से जिले में बूंदाबांदी शुरू हुई तो गर्मी से राहत मिली। तापमान में गिरावट आते ही हीट स्ट्रोक का खतरा कम हुआ, लेकिन बरसात की वजह से मच्छर पैदा होने के कारण मलेरिया का खतरा बढ़ गया।

मलेरिया को लेकर वर्ष 2018 में हाईरिस्क की श्रेणी में रह चुका है जिला
मलेरिया को लेकर जिला हाईरिस्क श्रेणी में रह चुका है। यहां वर्ष 2018 में मलेरिया के इतने मामले सामने आए थे कि जिला प्रदेश में मलेरिया पीड़ितों के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच गया था। इसके बाद यहां मलेरिया को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई, जिससे हालात कुछ नियंत्रण में आए। फिलहाल मलेरिया विभाग की ओर से दातागंज, समरेर, जगत और सालारपुर ब्लॉक में मलेरिया के ज्यादा मामले सामने आने के कारण इनको मलेरिया प्रभावित घोषित किया जा चुका है। यहां पर विशेष टीमें गांवों में जाकर अभी से स्थिति पर नजर रख रहीं हैं।

मच्छरों पर शोध के लिए शुरू किया गया सर्वे
मच्छरों पर शोध के लिए यहां प्रयोगशाला बनाई गई है। यहां मच्छरों को पकड़कर शोध किया जाएगा कि एंटी लार्वा के छिड़काव के बाद भी मच्छर हर साल अपना स्वरूप क्यों बदल रहा है। साथ ही उनपर कीटनाशक दवाओं का कितना असर हो रहा है यह भी जाना जाएगा। इसी क्रम में मच्छरों पर शोध के लिए सालारपुर ब्लॉक के चार गांवों को चयनित किया जाना है। इन गांवों का अब प्रयोगशाला को संचालित करने वाला स्टाफ सर्वे कर रहा है।

सरकारी रिकॉर्ड में मलेरिया के अब तक 65 मामले
- सरकारी रिकॉर्ड में मलेरिया के अब तक 65 मामले दर्ज किए गए हैं। यह मरीज तब सामने आए हैं जब मच्छर जनित बीमारियों के फैलने का खतरा नहीं कम होता है। ऐसे में अब बारिश की वजह से मच्छर जनित बीमारियों के बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।
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पिछले तीन साल में सामने आए मच्छर जनित मामले
वर्ष 2020
- पीवी मलेरिया के मरीजों की संख्या - 1085
- फैल्सीपेरम के मरीजों की संख्या - 1902
- डेंगू के मरीजों की संख्या - सात
वर्ष 2021
- पीवी मलेरिया के मरीजों की संख्या - 1506
- फैल्सीपेरम के मरीजों की संख्या - 159
- डेंगू के मरीजों की संख्या - 471
वर्ष 2022
- पीवी मलेरिया के मरीजों की संख्या - 1279
- फैल्सीपेरम के मरीजों की संख्या - 94
- डेंगू के मरीजों की संख्या - 579

तापमान में गिरावट आने से हीट स्ट्रोक का खतरा कम हुआ है, लेकिन बारिश की वजह से मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसको लेकर मलेरिया विभाग को सतर्क किया गया है। ज्यादा से ज्यादा जांचें कराई जा रहीं हैं, ताकि मरीज सामने आ सकें और उनका उपचार किया जा सके।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ

जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की लाइन। संवाद

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