स्वच्छता अभियान को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार से लेकर जिला प्रशासन तक के लोग जिले को खुले में शौच मुक्त कराने में जुटे हुए हैं। स्वच्छता मिशन के तहत जिले को ओडीएफ करने के लिए जिला प्रशासन ने ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए एक नया तरीका अपनाया है। अब ग्रामीणों के अभिलेखों पर शौचालय की रिपोर्ट दर्शाई जाएगी कि उनके पास शौचालय हैं या नहीं। ओडीएफ को लेकर शासन का दबाव है कि जिले को 31 दिसंबर तक हर हाल में ओडीएफ करना है, इस पर जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्तव ने बताया कि अब हर सरकारी अभिलेख पर मोहर लगाई जाएगी। कहा कि कोई व्यक्ति बैंक जाता है तो बैंक अधिकारी उससे पूछेंगे कि शौचालय है या नही, अगर है तो, ‘है’ की मोहर लगाएंगे और नहीं है तो, ’नहीं’, की मोहर पासबुक पर लगाई जाएगी। इसी प्रकार बिजली का बिल जमा करने वाले की रसीद पर, अस्पताल में दवाई लेने के पर्चे पर, तहसील दिवस के दौरान शिकायत करने पर उसकी रिसीविंग पर, विकास भवन में किसी समस्या को लेकर जाने वाले के प्रपत्र पर, सरकारी दुकान से बीज खरीदने की रसीद पर, या अन्य किसी दफ्तर में जाते हैं, तो इसी दौरान उनसे ओडीएफ के संबंध में जानकारी ली जाएगी और सभी इस संबंध में उन्हें रिपोर्ट देंगे। ताकि प्रशासन को पता लग सके कि जिले में कितने परिवारों के पास शौचालय हैं या नहीं हैं। डीएम ने बताया कि सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे मोहर बनवा कर उनके अभिलेखों पर लगाएं। डीएम का कहना है कि ऐसा करने में जिला प्रशासन को ओडीएफ के लिए जागरूक करने में आसानी रहेगी। कहा कि जिले में अभी करीब दो लाख के आस-पास शौचालय बनना बाकी हैं, समय कम है। लोगों को लगातार जागरूक और ओडीएफ का अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। जिले में करीब सौ टीमें गांव-गांव जाकर लोगों को प्रेरित करने में लगाई गई हैं।