बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन खरीद घोटाला, चिकित्सकों की बायोमीट्रिक से हाजिरी न लगवाने, फैकल्टी कम होने के साथ ही कई अन्य आरोपों में घिरने के बाद शासन ने यहां के प्राचार्य को हटा दिया है। ऐसे में अब नए प्राचार्य को इन सभी चुनौतियों का सामना करना होगा।
ऑक्सीजन खरीद की जांच जहां लोकायुक्त के यहां से चल रही है। वहीं यहां की अनियमितताओं को लेकर हाईकोर्ट में जो याचिका दाखिल की गई है, उस पर भी जवाब मांगा गया है। हाईकोर्ट में जवाब भी नए प्राचार्य को ही दाखिल करना होगा। इसके साथ ही यहां कम हुईं फैकल्टी को पूरा करने की चुनौती से भी नए प्राचार्य डॉ. एनसी प्रजापति को जूझना होगा।
मरीजों को रेफर करने का खेल करना होगा बंद
राजकीय मेडिकल कॉलेज से मरीजों का रेफर करने का खेल काफी समय से चल रहा है। यहां तैनात विशेषज्ञ गंभीर मरीज को इलाज देने के बजाय उसे हायर सेंटर रेफर कर देते हैं। सबसे ज्यादा मरीज यहां से सैफई मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किए जाते हैं। इसे लेकर कई बार सैफई मेडिकल कॉलेज प्रबंधन नाराजगी भी जाहिर कर चुका है। अब नए प्राचार्य को इस पर भी ध्यान होगा, क्योंकि मरीजों को रेफर करने की वजह से इलाज के अभाव में कई मरीजों की मौत भी हो चुकी है। यह बिंदु भी हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में शामिल किया गया है। जवाब में इसमें सुधार का शपथ पत्र भी देना होगा।
एमबीबीएस की मान्यता बचाना भी चुनौतीपूर्ण
मेडिकल कॉलेज में 30 से 35 प्रतिशत ही फैकल्टी बची है। एमबीबीएस की जब मान्यता मिली थी तो एनएमसी (राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग) की गाइडलाइन के तहत यहां न्यूनतम फैकल्टी 80 प्रतिशत से ज्यादा थी। सभी विभागों के एचओडी तैनात थे मगर प्राचार्य रहे डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता के कार्यकाल में प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर नौकरी छोड़कर जाते रहे। कई डॉक्टरों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इस वजह से फैकल्टी एनएमसी की गाइडलाइन के मुताबिक काफी कम रह गई हैं। लिहाजा एमबीबीएस की मान्यता पर भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में नए प्राचार्य के सामने फैकल्टी को पूरा करना भी एक चुनौती है।
सीसीटीवी कैमरे और बायोमीट्रिक सिस्टम भी करना होगा दुरुस्त
मेडिकल कॉलेज में जो अनियमितताएं की गई हैं, उसमें सीसीटीवी कैमरे और बायोमीट्रिक हाजिरी भी शामिल है। वजह है कि यहां कई डॉक्टर नहीं आते हैं। महीने में एक-दो दिन वे दिखाई देते हैं और उनका हर माह वेतन जारी कर दिया जाता है। ऐसे में बायोमीट्रिक सिस्टम को अपडेट करने के साथ ही वहां सीसीटीवी कैमरे भी लगाने होंगे ताकि कौन डॉक्टर किस वक्त हाजिरी लगाता है यह सीसीटीवी में भी आ जाए।
डॉ. प्रजापति पहले भी रह चुके हैं प्रचार्य, आगरा के मामले में हुए थे निलंबित
- नए प्राचार्य डॉ. एनसी प्रजापति मेडिकल कॉलेज की शुरूआत में यहां के प्राचार्य रहे थे। डॉ. प्रजापति आगरा में तैनाती के दौरान निलंबित हुए थे। पूर्व मुख्यमंत्री ने वर्ष 2015 में आगरा मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था, उस दौरान अनियमितताएं सामने आने पर उनको निलंबित किया गया था। स्थानीय राजकीय मेडिकल कॉलेज में उनका पहला कार्यकाल लंबा नहीं रहा। अब दोबारा उनको यहां का प्राचार्य ऐसी स्थिति में बनाया गया है, जब अनियमितताओं को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन घिरा हुआ है।
ऑक्सीजन घोटाले के साथ ही कई अनियमितताएं उजागर होने पर गिरी प्राचार्य पर गाज
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- प्राचार्य रहे डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता के कार्यकाल में कई मामले उजागर हुए थे। सबसे ज्यादा ऑक्सीजन खरीद घोटाले में उनपर आरोप लगे थे। इसके साथ ही एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को पोस्टमार्टम न दिखाना और उनके लगातार क्लास न लगने समेत अन्य भी कई आरोप मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर लगते रहे।
मेडिकल कॉलेज में दो-दो ऑक्सीजन प्लांट होने के बाद भी कोरोना काल में बाहर से ऑक्सीजन खरीदी गई तो इस मामले में वह पूरी तरह से घिर गए। ऑक्सीजन घोटाले की जांच लोकायुक्त से शुरू हुई तो वह ऑक्सीजन खरीद का कोई रिकाॅर्ड भी नहीं दिखा पाए। इसी वजह से डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता पर गाज गिरी।
(28 बीडीएन-29)डॉ.धर्मेद्र गुप्ता।