बदायूं। शहर के 28 हजार घरों व प्रतिष्ठानों का निस्तारण करने की व्यवस्था चार साल से कागजी प्रक्रिया में फंसी है। तिराहे, चौराहों के पास में कूड़ेदान में कूड़ा डालने जाना पड़ता है। कूड़ेदान के भर जाने पर मजबूरी में लोगों को सड़क किनारे कूड़ा फेंकना पड़ता है। घरों से कूड़ा उठाकर एमआरएफ सेंटर में लेकर उसका निस्तारण करने की योजना पांच साल पहले बनी। अमर अब तक नहीं हुआ। टेंडर निकाले गए लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चाक-चौबंद रह सके। इसको लेकर नगर पालिका परिषद द्वारा प्रयास किया जा रहा है। इसको लेकर 2020 में पालिका की ओर से 42 लाख रुपये की लागत से शेखूपुर रोड पर एमआरएफ सेंटर बनाया था। इसका उद्धाटन तत्कालीन डीएम कुमार प्रशांत ने जनप्रतिनिधियाें के साथ में किया था। तब उम्मीद जताई थी कि जल्द ही यह शुरू हो जाएगा। तो शहर से प्रतिदिन निकलने वाले 56 टन कूड़े का निस्तारण आराम से हो सकेगा और सड़क पर पड़ने वाले कूड़े से निजात मिल सकेगी। लेकिन चार साल बीत गए, आज तक यह शुरू नहीं हो सका। पालिका परिषद के अनुसार तब से लेकर आज तक तीन बार टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन फर्मों ने इसमें रूचि नहीं ली। पालिका के अनुसार अब कुछ फर्म संपर्क में आयी है, जो काम करने में रूचि दिखा रही है। ऐसे में चुनाव बाद में एक बार फिर से टेंडर निकाला जाएगा। ताकि शहर में एमआरएफ सेंटर शुरू हो सके।
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2022 टेंडर प्रक्रिया हुई थी पूरी, बाद में ठेकेदार ने किया था मना
-नगर पालिका परिषद की तरफ से एमआरएफ सेंटर बनने के बाद में 2021 में पहली बार टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई। जब मात्र दो फर्म आयी थी। जिसकी कम से कम तीन फर्म को आवेदन करना जरूरी थी। ऐसे में कोरम पूरा नहीं हो सका था। प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी थी। 2022 में पालिका द्वारा फिर से टेंडर निकाला गया था। वहां पर टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हो गई थी। ठेकेदार को चयन कर लिया गया था, लेकिन बाद में ठेकेदार ने असमर्थता जताते हुए काम करने से मना कर दिया। उसके बाद में मार्च 2024 में एक बार फिर से टेंडर निकाला। लेकिन इस बार किसी भी फर्म ने प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।
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