फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Budaun News: कोविड जांच की फर्जी रिपोर्ट चाहिए या टीका लगने का प्रमाण... यहां सब बनता है

विज्ञापन
कोविड की फर्जी आरटीपीसीआर जांच की रिपोर्ट, जिसमें जिला बदायूं और ब्लॉक संभल लिखा है। संवाद
विज्ञापन
जांच रिपोर्ट की कई प्रतियां सामने आईं, स्वास्थ्य विभाग ने की फर्जी होने की पुष्टि
विज्ञापन


नहीं हुआ सरकारी रिकॉर्ड से मिलान, जेल में मिलाई के लिए इस्तेमाल होने की आशंका

सौरभ सक्सेना

बदायूं। कोविड जांच की फर्जी रिपोर्ट हो या टीका लगने का प्रमाण...। कचहरी के पास सक्रिय दलाल यहां एक ठिकाने पर सब कुछ बनवाने का दावा कर रहे हैं। इसके लिए कोई दस्तावेज भी देने की जरूरत नहीं पड़ रही। सिर्फ तीन सौ से पांच सौ रुपये लिए जा रहे हैं। यह फर्जीवाड़ा सुबह सात से 11 बजे तक ही किया जा रहा है। इससे चार से पांच हजार रुपये की रोजाना कमाई हो रही है।
अमर उजाला को कुछ ऐसी ही रिपोर्ट हाथ लगीं तो इसकी पड़ताल की गई। इसके बाद पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया। स्वास्थ्य विभाग ने भी इन रिपोर्ट के फर्जी होने की पुष्टि की है। खास बात ये है कि यह खेल प्रशासन की नाक के नीचे यानी कलक्ट्रेट गेट के पास हो रहा है। मगर कार्रवाई के लिए अफसरों को शिकायत का इंतजार है। आशंका है कि जेल में बंदियों से मिलाई के लिए फर्जी रिपोर्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। (संवाद)
विज्ञापन

-
दलाल ने पूछा- जेल में मिलाई करनी या अमरनाथ यात्रा पर जाना
फर्जी रिपोर्ट बनाने का यह खेल शहर में काफी समय से चल रहा है। सूत्रों से पता चला कि कलक्ट्रेट गेट के पास एक ठिकाने पर तमाम लोग फर्जी आरटीपीसीआर और टीकाकरण रिपोर्ट बनवा चुके हैं। इन्हीं में से कुछ रिपोर्ट लीक हो गईं। इसके बाद टीम गठित कर अमर उजाला ने एक दलाल के जरिये सबूत के तौर पर एक फर्जी रिपोर्ट तैयार भी करवाई। रिपोर्ट तैयार करने से पहले दलाल ने पूछा- जेल में मिलाई करनी है या अमरनाथ यात्रा पर जाना है। उसे बताया गया जेल में मिलाई करनी है।

-
जेल प्रशासन गच्चा खा रहा या कोई और बात
जेल में किसी से भी मिलाई से पहले कोविड की जांच या टीकाकरण रिपोर्ट की जरूरत होती है। इसके बगैर मिलाई नहीं होती। सवाल यह है कि क्या वाकई जेल में फर्जी रिपोर्ट लगाकर मिलाई हो रही है? क्या जेल प्रशासन रिपोर्ट की पड़ताल में गच्चा खा रहा है या कोई और बात है। दरअसल, ज्यादातर रिपोर्ट ऐसी हैं, जिनमें कुछ न कुछ गलतियां हैं। वे आसानी से पकड़ में आ रही हैं। फिर किसी की इस पर नजर न पड़ना हैरत में डालने वाला है। खास बात ये भी है कि रिपोर्ट न होने पर जेल से लौटाए जा रहे लोग सीधे इसी ठिकाने पर पहुंच जाते हैं।

-
केस आईडी और मोबाइल नंबरों से हुई फर्जीवाड़े की पुष्टि
फर्जीवाड़ा कर तैयार की गईं आरटीपीसीआर रिपोर्ट में जो केस आईडी और मोबाइल नंबर पड़े हैं उनका स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से मिलान नहीं हो रहा है। फर्जी आईडी बनाते समय जिले और ब्लॉक का नाम भी गलत कर दिया गया है। केस आईडी-बीएडीएन 0084643901 पर जिले का नाम बदायूं पड़ा है। मगर ब्लॉक का नाम बरेली डाल दिया गया है। इसी तरह केस आईडी 0084178178132 पर जिले का नाम बदायूं और ब्लॉक का नाम संभल पड़ा है। सैंपल आईडी भी फर्जी है। इसी तरह टीकाकरण रिपोर्ट में भी गड़बड़ियां हैं।


-जो रिपोर्ट सामने आई हैं, वे सभी फर्जी हैं। किसी ने कंप्यूटर पर नाम पता दर्ज कर बना दी हैं। इसमें दर्ज नाम, पता, केस आईडी और सैंपल आईडी का विभाग के डाटा से मिलान नहीं हो रहा।
विज्ञापन

आसिफ, कोविड हेल्पडेस्क ऑपरेटर, जिला अस्पताल
-

फर्जी रिपोर्ट को दिखाकर यदि मिलाई की गई है तो ऐसा संभव भी है, क्योंकि इसकी जांच के लिए हमारे पास कुछ नहीं है। मिलाई के लिए कुछ प्राइवेट कर्मचारी रखे हैं, लेकिन अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। यदि ऐसा हुआ है तो इसे चेक कराएंगे। यदि कोई पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
डॉ. विनय कुमार, जेल अधीक्षक

-
प्रकरण संज्ञान में नहीं आया है। किसी ने अभी तक शिकायत भी नहीं की है। कोई शिकायत करे तो इसे चेक करवाएं।
डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें