शुभारंभ करते हुए आदर्श कुमार ‘समय’ ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कवि जयवीर चंद्रवंशी पहली रचना कुछ इस प्रकार पढ़ी-
कारगिल में जो लिख गए
निज खून से संदेश
उन वीरों की याद को
नमन करे यह देश
अध्यक्षता कर रहे डॉ. दुर्गेश वशिष्ठ ने पढ़ा-
दिवस कारगिल याद कर, वीरों का सम्मान
नमन उन्हें जो कर गए खुद अपना बलिदान
युवा शायर अनिल रस्तोगी ने भारतीयता की अपनी अलग पहचान को पंक्तियों में पिरोया-
हमारी शक्ति के आगे ये दुनिया सर झुकाती है
हमारी एकता को देखकर ये खौफ खाती है
हमारा मुल्क सबको प्यार का पैगाम देता है
जमी ये देश भक्ति की सदा फसलें उगाती है
शायर सुरेंद्र ‘नाज’ ने अपनी बात कुछ इस तरह रखी-
लहू जो मेरी आंखों में उतर आए तो क्या होगा
मेरी तलवार पर दुश्मन का सर आए तो क्या होगा
आदर्श कुमार ने कहा कि-
जिनके खून से महके प्यारा चमन मेरा
जिनसे रक्षित रहता प्यारा वतन मेरा
अजीत रस्तोगी ‘सुभाषित’ ने कहा कि-
सब जन अपना तमन मन अर्पित करते हैं
प्रेम से श्रद्धा सुमन समर्पित करते हैं
भारत की खातिर जो वीर शहीद हुए
हम सब उन पर खुद को गर्वित करते हैं
अजीत रस्तोगी ने पढ़ा-
है किसकों फिक्र शहीदों की उन विधवाओं की
कोई नहीं बातें करता वीरों की शौर्य कथाओं की
इस मौके पर षट्बदन शंखधार, पवन शंखधार ने भी रचनाएं पढ़ीं। कार्यक्रम के अंत में संस्था अध्यक्षत राहुल चौबे ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर हार्दिक रस्तोगी, अमन चतुर्वेदी, अमन शर्मा, अचिम मासूम, कामेश पाठक का विशेष सहयोग रहा।