बदायूं। महिला के शव से आंखें निकलने के मामले में सीएमओ डाॅ. प्रदीप कुमार के निलंबन के बाद अभी शासन स्तर से नए सीएमओ की तैनाती नहीं की गई है लेकिन आने वाले सीएमओ को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। झोलाछाप पर कार्रवाई से लेकर बदहाल पोस्टमार्टम हाउस की दशा सुधारने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
दरअसल यहां स्वास्थ्य विभाग बीते वर्षों में एनएचआरएम घोटाला, पीपीई किट खरीद घोटाला, संविदा कर्मचारियों की भर्ती घोटाला, लेंस खरीद घोटाला, दवा खरीद घोटाले के कारण चर्चा में रहा है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर झोलाछाप से उगाही और बेरोजगार युवाओं से ठगी के आरोप लगे हैं। जिले में हजारों झोलाछाप स्वास्थ्य विभाग से सांठगांठ कर अपनी दुकानें चला रहे हैं। तमाम बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल चल रहे हैं। जगह-जगह अवैध रूप से पैथोलॉजी लैब खुली हुईं हैं। शिकायतों पर यहां कई बार जांच हुई लेकिन कभी भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
शासन स्तर से पांच सीएमओ पर हो चुकी है कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही के चलते पूर्व में भी दो सीएमओ को निलंबित किया जा चुका है। इनमें सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद नशे में गालीगलौज करने के मामले में निलंबित हुए थे। उनकी एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इसके अलावा सीएमओ डॉ. आशाराम निलंबित हुए थे। इसी क्रम में 2018 में युवक का पत्नी के शव को कंधे पर ले जाते हुए वीडियो वायरल हुआ था। उस मामले में सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा हटाए गए थे। सीएमओ डॉ. यशपाल सिंह भी लापरवाही में हटे। डॉ. प्रदीप कुमार तीसरे सीएमओ हैं, जिनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है।