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सावधान! हाईवे पर मक्का सूख रही है.. जरा बचाकर निकालें वाहन

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उझानी (बदायूं)। बरेली-मथुरा हाईवे या फिर दिल्ली रोड पर होकर इन दिनों आपको सफर करना है तो रफ्तार पर कंट्रोल ज्यादा फायदेमंद रहेगा। हाईवे से लेकर संपर्क मार्गों तक किसानों ने मक्का सुखाने के लिए कब्जा कर रखा है। हाईवे भले ही निर्माणाधीन है लेकिन दोनों ओर मक्का फैला दिए जाने से ड्राइवरों को वाहन एक-दूसरे से बचा पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसा भी नहीं कि हाईवे पर होकर किसीअफसर की नजर मक्का की ओर नहीं जाती। नजर तो पड़ती है पर कोई गौर नहीं करता। इसलिए अच्छा तो यही रहेगा कि खुद ही बचाककर वाहन निकाल ले जाएं। मक्का की वजह से इलाके में बदायूं-मेरठ,बदायूं-बिजनौर और बरेली-मथुरा हाईवे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बरेली-मथुरा और दिल्ली हाईवे को जोड़ने वाले बाईपास पर तो मक्का उत्पादकों का जैसे कब्जा बना हुआ है। करीब एक सप्ताह से हाईवे पर सड़क के दोनों ओर सुखाने के लिए मक्का उड़ेल दी गई। वाहनों की चपेट मेंआकर मक्का इधर-उधर, बिखरने के बचाने को किसानों ने सड़क पर ही ईंटें लगा रखी हैं लेकिन किसी को इस बात की चिंता नहीं कि बाइक सवार कोई भी व्यक्ति चपेट में आया तो सुरक्षित कैसे बच पाएगा। बदायूं से इस्लामनगर,उझानी से बिल्सी(वाया संजरपुर) पर भी कमोवेश ऐसा ही नजारा बना हुआ है। बताते हैं कि कुछ स्थानों पर तो किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को भी सड़क किनारे खड़ी कर लेते हैं, जिससे दूसरे वाहन सवार लोगों को दिक्कत बढ़ जातीहै। इसके विपरीत इलाके के लोगों की मानें तो हाईवे पर होकर रोजाना ही हजारों की संख्या में वाहन गुजरते हैं। पुलिस और प्रशासनिकअफसर भी सरकारी वाहनों से निकलते हैं लेकिन लोगों पर जोखिम से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर किसी की नजर नहीं पड़ती। पिछले साल दो राहगीरों की चली गई थी जान उझानी। हाईवेपर पिछले साल भी मक्का सुखानेका दौर चला था। उझानी-बिल्सीरोड पर रिसौली निवासी तीन बाइक सवार पांच युवक, कछला के पास कार सवार आगरा का दंपती, मुुरादाबाद-फर्रुखाबाद रोड परआधा दर्जन लोग घायल हो गएथे। सिविल लाइंसऔर बिल्सी क्षेत्र के दो लोगोंको जान भी गंवानी पड़ी थी। तब पीडब्ल्यूडी केअफसरों ने हस्तक्षेप कर बरेली-मथुरा हाईवे से कई किसानों को खदेड़ दिया था। इसके चलते उन्हें मक्काभी हटानी पड़गई थी। किसान बोले,परौटियां बची नहीं, कहां सुखाएं मक्का : उझानी। सड़कों पर मक्का सुखाने को लेकर लोगों की जान से बेपरवाह किसानों की अपनी दलीलें हैं। किसानों में संजरपुर के नंदराम और गद्दीटोला मोहल्ले के हरीओम की मानें तो पहले गांवों से लेकर कसबों में सरकारी परौटियां हुआ करती थीं। परौटियों में फसलों की गहाई से लेकर सुखाने का काम किया जाता था। अब तो देहात में भी ग्राम सभा की खाली जमीन नहीं बची है। ऐसे में सड़कें ही इकलौता सहारा बनी हुई हैं। सड़कों के अलावा वे जाएं भी तो कहां जाएं।
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