स्कूलों में ज्यादा बार टॉयलेट जाने वाले बच्चों को टीचर सख्त नजरों से देखते हैं। शिक्षक मानते हैं कि कि टॉयलेट के नाम पर बच्चे पूरे स्कूल में घूमते हैं। लेकिन कई बार यह सख्ती बच्चों को पेरशानी में डालती हैँ। बाल रोग विषेज्ञों का मनाना है, कि टॉयलेट पॉल्सी को लेकर स्कूल आवश्यकता के हिसाब से संवेदनशील नहीं है। आवास विकास की प्रियंका ने बताया कि कक्षा पांच में पढ़ने वाली उनकी बेटी के पेट में दर्द होने लगता है। उनकी बेटी ने बताया कि वह टीचरों के डर की वजह से टॉयलेट नही जा पाती है। क्योंकि टीचर भी कई बार टायलेट को लेकर मना कर चुके हैं। इसलिए वह कई वार टॉयेलट कंट्रोल कर चुकी है। पब्लिक स्कूलों में यह हाल आम बात है। ज्यादा बार टायॅलेट जाने पर डांट पड़ने के डर से बच्चों को करना पड़ता है कंट्रोल कक्षा एक से लेकर 10वीं तक के बच्चों को बिस्तर गीला करने जैसी बीमारियों का बड़ा कराण स्कूल समय में टॉयलेट रोकना है। इसके अलावा गंदे टॉयलेट के इस्मेमाल से मूत्र के रास्ते में संक्रमण होता है। इसलिए लड़कियां ज्यादा प्रभावित होती हैं।