बदायूं। किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म के दो साल पुराने मामले में विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश दीपक यादव ने युवक को दोषी करार दिया है। उन्होंने आजीवन कारावास की सजा के साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आदेश दिया है कि जुर्माने की पूरी धनराशि पीड़िता को दी जाए।
दातागंज थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले व्यक्ति ने 18 नवंबर 2021 को पुलिस को तहरीर दी थी। बताया था कि वह परिवार के साथ भतीजे के नामकरण संस्कार में कादरचौक थाना क्षेत्र के एक गांव में गए थे। घर पर उसकी नाबालिग बेटी और पत्नी घर में सो रही थी। रात करीब तीन बजे परिचित प्रेम कुमार घर में घुस आया और बेटी को साथ ले गया।
दोपहर करीब दो बजे जब वह घर लौटा तो पता लगा कि प्रेमकुमार बेटी को ले गया है। थाना पुलिस ने तहरीर के आधार पर किशोरी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली। पुलिस ने किशोरी को बरामद किया। आरोपी प्रेमकुमार भी पकड़ा गया। किशोरी के कोर्ट में बयान दर्ज कराए गए। उसने बताया कि प्रेमकुमार शादी का झांसा देकर उसे अपने साथ ले गया था। अनजान जगह पर ले जाकर उसकी बिना मर्जी के शारीरिक संबंध बनाए। पुलिस ने घटना से संबंधित सभी साक्ष्यों का संज्ञान लेने के बाद प्रेमकुमार के खिलाफ अपहरण व दुष्कर्म की धारा में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। तब से मामला न्यायालय में विचाराधीन था। न्यायाधीश ने शुक्रवार को पत्रावली पर साक्ष्यों का अवलोकन कर विशेष लोक अभियोजक अमोल जौहरी व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद सजा सुनाई।
किशोरी से छेड़खानी के दोषी को तीन साल की सजा
बदायूं। विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश दीपक यादव ने छेड़खानी के मामले में युवक को दोषी करार दिया है। दोषी को तीन साल की सजा सुनाते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
उघैती थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले व्यक्ति ने 31 मई 2021 को एसएसपी को शिकायती पत्र दिया था। बताया था कि 19 मई 2021 को सुबह करीब सात बजे वह पत्नी को दवा दिलाने पीलीभीत गया था। घर पर 15 वर्ष की बेटी के साथ 12 और सात वर्ष का बेटा घर पर था। पूर्वाह्न करीब 10.30 बजे परिचित महिपाल घर में घुस आया। युवक ने गलत नीयत से बेटी को दबोच लिया और उसके साथ अश्लील हरकतें करने लगा। शोर सुनकर उसका भाई और मोहल्ले के लोग मौके पर पहुंच गए, जिन्हें देख आरोपी मौके से भाग गया। दवा दिलाकर जब वह 26 मई 2021 को घर लौटा तो पूरी घटना की जानकारी बेटी और भाई ने दी। इस पर वह बेटी को लेकर थाने गया, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसके बाद एसएसपी को शिकायती पत्र दिया।
एसएसपी के आदेश पर थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। इस मामले की विवेचना एसआई जितेंद्र सिंह ने की। तब से मामला न्यायालय में विचाराधीन था। शुक्रवार को न्यायाधीश ने विशेष अभियोजक अमोल जौहरी व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद दोषी को सजा सुनाई।