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सार्वजनिक स्थानों पर भी लाइन, पोल और ट्रांसफार्मरों को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं

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शहर में पंजाबी मोहल्ला स्थित गुरुद्वारा के पास झुका हुआ जर्जर बिजली पोल। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। बारिश के दिनों में करंट से मौतों का मामला पिछले वर्ष लोकसभा में उठने के बाद भी जिम्मेदारों ने कोई सबक नहीं लिया। इसलिए करंट से मौतों का सिलसिला जारी है। शहर समेत जिलेभर में सार्वजनिक स्थानों पर खुले में ट्रांसफार्मर रखे हैं, तो जर्जर बिजली पोल और लाइनें भी मौत को दावत दी रही हैं। हाईटेंशन लाइन टूटने, बिजली के पोल और पानी में करंट उतरने के कारण मरने वाले बेजुबानों की संख्या का आंकड़ा तक नहीं है।
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पिछले वर्ष बारिश के दिनों में मीराजी चौकी के पास गणित प्रवक्ता की और बाबा कॉलोनी में दरोगा के दिव्यांग बेटी की अंडरग्राउंड लाइन की चपेट में आने से जान चली गई। उस समय शासन स्तर तक हंगामा हुआ था। सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य ने मामले को लोकसभा में भी उठाया। एक वर्ष के बाद भी पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों की कार्यप्रणाली में बदलाव नहीं आया।
इस वर्ष 21 अगस्त को अलापुर में हाईटेंशन लाइन टूटने से बाइक सवार दो लोगों की मौत हो गई। 22 अगस्त को कादरचौक में एचटी लाइन टूटने से बुजुर्ग की जान चली गई। अलापुर वाले मामले में 10 बिजली कर्मियों पर रिपोर्ट हुई थी, लेकिन अभी इसकी भी जांच चल रही है। इस वर्ष भी बारिश के सीजन में कई बेजुबानों की करंट लगने से मौत हो चुकी है।
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सिर्फ पालतू पशुओं की मौत की शिकायत
अगर किसी का कोई पालतू पशु करंट लगने से मरता है, तब ही पावर कॉरपोरेशन से पुलिस के पास शिकायत पहुंचती है। घुमंतू पशुओं का कोई आंकड़ा ही नहीं है। करंट से मरने वाले बेजुबानों में घुमंतू गोवंशीय पशुओं की बड़ी संख्या है। सबसे ज्यादा गोवंशीय पशुओं की करंट से शहर में ही जान जाती है। शहर में अंडरग्राउंड और ओवरहेड लाइनें दोनों जान की दुश्मन बनी हुई हैं और पावर कॉरपोरेशन के जिम्मेदार हादसा होने पर सफाई देते हुए जांच के बाद कार्रवाई की बात कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं।
लाइनों और बिजली पोलों का लगातार अनुरक्षण कराया जाता है। बारिश के मौसम के दौरान लोगों को भी जागरूक किया जाता है कि बिजली पोल से दूर रहें। अगर कहीं से शिकायत आती है तो प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाती है। कई स्थानों पर लाइनें बदलने के लिए प्रस्ताव गए हुए हैं। करंट से होने वाले हादसों के लेकर लाइनमैन से लेकर जेई, एई, एसडीओ और एक्सईएन तक की जिम्मेदारी तय है। किसी की लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई भी की जाती है और पीड़ित पक्ष को मुआवजा भी दिलाया जाता है। -दीपक कुमार, अधीक्षक अभियंता

शहर में मालवीयगंज पुलिस चौकी के पास बेतरतीब लाइनें और ट्रांसफार्मर। संवाद- फोटो : BADAUN

 

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