एमवी एक्ट के तहत सीज किए गए वाहनों के अलावा सभी चालानी रिपोर्ट एआरटीओ कार्यालय भेजे जाने पर नाराज अधिवक्ताओं ने सीओ का घेराव कर जमकर नारेबाजी की। साथ ही मुख्यमंत्री समेत पुलिस के आला अफसरों को ज्ञापन भेजकर पूर्व की भांति सभी चालानी रिपोर्ट मुंसिफ कोर्ट भेजे जाने की मांग की। मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई। मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में बताया गया है कि सहसवान, मुजरिया, जरीफनगर थानों में एमवी एक्ट के तहत सीज किए गए वाहनों के अलावा सभी चालानी मुकदमे सुनने का अधिकार सहसवान न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्राप्त है। पुलिस क्षेत्राधिकारी राजनीतिक दबाव में कुछ मुकदमे सहसवान न्यायालय भेज देते है और अधिकतर मुकदमों को एआरटीओ कार्यालय भेज दिया जाता है। साथ ही चालानों पर मनमाना जुर्माना वसूला जाता है और रसीद भी नहीं दी जाती है। कार्यालय में एमवी एक्ट के चालानों को अनावश्यक रूप से तीन-तीन माह तक रोका जाता है, जो न्याय प्रक्रिया के विपरीत है। एमवी एक्ट के सभी चालानी मुकदमों को एआरटीओ कार्यालय भेजे जाने से लोगों को बदायूूं तक दौड़ लगानी पड़ती है और उनका समय और धन अधिक खर्च होता है। जबकि शासन की मंशा है कि लोगों को सस्ता एवं सुलभ न्याय मिले। इस तरह से सीओ की ओर से शासन की नीतियों का उल्लंघन किया जा रहा है। इसके अलावा सीओ कार्यालय में तैनात संबद्ध कर्मचारी की ओर से अधिवक्ताओं के बेन्ड पर मजाकिया अंदाज में टिप्पणी करने को लेकर अधिवक्ताओं में रोष रहा। अधिवक्ताओं ने सभी चालानी रिपोर्ट सहसवान न्यायालय भेजे जाने और संबद्ध कर्मचारी को सीओ पेशी से तत्काल हटाकर मूल तैनाती थाना जरीफनगर पर भेेजे जाने की मांग को लेकर सीओ का घेराव किया और जमकर पुलिस विरोधी नारेबाजी की। अधिवक्ताओं ने मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। इस मौके पर पूर्व बार अध्यक्ष रियाज अहमद खां, श्याम बाबू सक्सेना, शांतिशरण शर्मा, श्याम सुंदर बाबू, राजीव, रागिब अली, आेंकार वार्ष्णेय, प्रशांत जौहरी, अतर सिंह शाक्य, शमशुल इस्लाम, मुहम्मद समी, एमएस नकवी, मुहम्मद हनीफ, मजाहिर अली, ज्याउल इस्लाम, जितेंद्र सिंह यादव, महावीर सिंह यादव, संदीप सक्सेना आदि मौजूद रहे।