वजीरगंज में श्री राम कथा का पाठ करते स्वामी रामचंद्राचार्य महाराज। संवाद
वजीरगंज। वार्ष्णेय धर्मशाला में चल रही श्रीराम कथा में रविवार को स्वामी रामचंद्राचार्य महाराज ने प्रभु श्रीराम और निषादराज की कथा सुनाई। उन्होंने प्रेम और ज्ञान की व्याख्या करते हुए कहा कि ज्ञान में कभी पक्षपात नहीं होता, जबकि प्रेम हमेशा पक्षपात पूर्ण होता है। ज्ञान कहता है कि भगवान सभी के हैं, जबकि प्रेम भगवान को सिर्फ अपना मानता है।
स्वामी ने कहा कि ज्ञान सांसारिक लाभ-हानि से मुक्त होता है, जबकि प्रेम में अनिष्ट की आशंका रहती है। ज्ञानी कहता है कि जो सारे जगत की रक्षा करता है। उसका अनिष्ट भला कौन कर सकता है, जबकि प्रेमी के मन में सदा यही भाव रहता है कि मैं भोग नहीं लगाऊंगा तो भगवान भूखे रह जाएंगे। पानी नहीं पिलाऊंगा तो प्यासे रह जाएंगे, रक्षा नहीं करूंगा तो खतरे में पड़ जाएंगे। कथा के दौरान प्रभाकर मिश्र, मुरली मनोहर गुप्ता, उमेश चंद्र वार्ष्णेय, राहुल वार्ष्णेय, दुर्विजय शंखधार, राजीव जैकी आदि मौजूद रहे।
वजीरगंज में श्री राम कथा का पाठ करते स्वामी रामचंद्राचार्य महाराज। संवाद