तमाम
कोशिशों के बावजूद सालों से
बदहाल पड़े कस्तूरबा गांधी
आवासीय बालिका विद्यालय की
बिगड़ी व्यवस्थाएं पटरी पर
नहीं आ पा रही हैं। छात्राओं
की सुविधाओं का भी ख्याल नहीं
रखा जा रहा है। हालात ये हैं
कि दिसंबर माह शुरू होने के
बाद भी विद्यालय की बालिकाओं
को गर्म ड्रेस तथा स्वेटर भी
उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
विद्यालय भवन की खिड़कियां
तक सलामत नहीं है। हर खिड़की
की जाली और कांच महीनों से
टूटे पड़े हैं। बावजूद इसके
विभाग आंखें बंद किए बैठा है।
छात्राएं ठंड से बचाव के इंतजाम
न होने से सर्दी में ठिठुरने
को मजबूर हैं।
विद्यालय
भवन निर्माण के साथ बने शौचालय
का टैंक सही न बना होने से
छात्राओं को शुरू से ही दिक्कतों
का सामना करना पड़ रहा है।
टैंक से हर महीने ओवरफ्लो होने
लगता है। इससे बदबू की वजह से
सांस लेना तक दुश्वार हो जाता
है। टैंक की सफाई के बाद कुछ
समय तक तो ठीक रहता है। लेकिन
फिर कुछ ही दिन बाद ही समस्या
शुरू हो जाती है। वहीं दिसंबर
शुरू होने के बाद भी अभी तक
छात्राओं को न गर्म कपड़े
मुहैया कराए गए हैं और न ही
स्वेटर। रजाई गद्दे भी खस्ताहाल
हैं।
बा स्कूलों में पढ़ने वाली
छात्राओं की सुरक्षा से भी
खिलवाड़ किया जा रहा है। जिसे
लेकर अभिभावकों में भी रोष
है। अभिभावकों का कहना है कि
स्कूल की बाउंड्रीवाल कई साल
से टूटी पड़ी है। जिसकी वजह
से न सिर्फ जानवर खुलेआम घूमते
हैं,
बल्कि
असामाजिक तत्व भी घूमते रहते
हैं।विद्यालय
के शौचालय टैंक को सही कराने
और बालिकाओं की सुरक्षा के
लिए बाउंड्रीवाल बनवाने को
कई बार लिखित रूप से शिकायत
करके कहा जा चुका है। कई बार
अधिकारियों द्वारा निरीक्षण
भी किया गया। मगर अभी तक कोई
कार्रवाई नहीं की गई है। -नीलम,
वार्डन,
बा
स्कूल।