बदायूं। जिले में प्रत्येक रविवार को मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला लगाए जाने का प्रावधान है। शासन की ओर से हर न्यू पीएचसी पर मेले के आयोजन को मरीजों की संख्या के आधार पर बजट भी दिया जाता है। इसके बाद भी जिले की न्यू पीएचसी में मेले के नाम पर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर तो सिर्फ बैनर टांगकर मरीजों के आंकड़े दर्शाए जा रहे हैं। मरीजों का आधार बेस्ड डाटा ऑनलाइन फीड न होने की वजह से उनकी संख्या में भी आंकड़ेबाजी का खेल चल रहा है।
जिले में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले के नाम पर भी खेल किया जा रहा है। मेला सुबह दस बजे से ही लगना चाहिए ताकि मरीजों की भीड़ उपकेंद्रों पर न लग सके। मरीजों की सभी जांचों के साथ-साथ उनको दवाएं देने के लिए सभी संसाधन न्यू पीएचसी पर उपलब्ध हैं लेकिन मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के बजाय विभाग मरीजों की संख्या में ही खेल कर रहा है। कुछ ही सेंटरों पर मेला लगाने की औपचारिकता पूरी की जाती हैं, बाकी केंद्र खाली पड़े रहते हैं। सुबह निर्धारित समय पर मेले का बैनर तो टांग दिया जाता है, लेकिन वहां स्टाफ अपने निजी कार्यों में ही व्यस्त रहता है।
खास बात यह है कि सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों का डाटा ऑनलाइन फीड किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। वजह है कि अगर ऑनलाइन डाटा फीड किया जाएगा तो उसमें आधार कार्ड का नंबर भी दर्ज करना होगा, इससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मरीजों की संख्या में खेल नहीं कर पाएंगे।
सीएमओ के निरीक्षण वाले उपकेंद्रों पर ही आयोजन
- रविवार को जन आरोग्य मेले में दो से तीन सेंटरों पर सीएमओ का निरीक्षण तय हो जाता है। उन केंद्रों पर सीएमओ के आने की सूचना मिलते ही व्यवस्थाएं दुरुस्त कर स्टाफ आसपास के मरीजों को सूचना देकर बुला लेता है। रविवार को भी सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने उघैती, खंडुआ, खितौरा और रसूलपुर कलां में लगे मेले में व्यवस्थाओं को देखा और व्यवस्थाओं में सुधार लाने के निर्देश दिए।
कुंवरगांव में बैनर लगा, लेकिन सूना पड़ा रहा केंद्र
- कुंवरगांव के न्यू पीएचसी पर रविवार को जन आरोग्य मेले के नाम पर सिर्फ बैनर टांग दिया गया। बैनर टांगने के बाद यह केंद्र सूना पड़ रहा है। यहां आसपास के लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी मरीजों को यहां नहीं देखा है।
हर बार बढ़ रहा मरीजों का आंकड़ा
- पिछले रविवार यानि पांच फरवरी को जन आरोग्य मेले में 2309 मरीजों की संख्या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताई थी। सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय को इस रविवार को लगे जन आरोग्य मेले में संबंधित कर्मचारियों ने 2815 मरीजों के इलाज किए जाने का आंकड़ा बताया है।
झोलाछापों पर निर्भर हैं मरीज
फोटो- 24
- सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं मिलता है। मजबूरन लोगों को झोलाछापों का ही सहारा है। कुंवरगांव के स्वास्थ्य केंद्र पर जन आरोग्य मेले में जाओ तो वहां स्टाफ नहीं मिलता है। - प्रदीप कुमार, बनगढ़
हमको नहीं पता कहां लगता है मेला
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- जन आरोग्य मेला हर रविवार को लगता है इसकी जानकारी नहीं है। एक दो बार कुंवरगांव के नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गए तो बंद मिला। इस योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। - हरपाल सिंह, अहरुइया
वर्जन
- सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर मेला लगाए जाने के निर्देश हैं और निर्धारित अवधि में मेला लगाया भी जाता है। ऐसे में किसी केंद्र पर सिर्फ बैनर टांगा जा रहा है तो संबंधित केंद्र प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मरीजों की संख्या ऑनलाइन फीड हो रही है, आधार बेस्ड सिस्टम जल्द ही चालू करा दिया जाएगा। - डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
(12 बीडीएन-23) कुंवरगांव में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का बैनर लगा मगर सूना पड़ा केंद्र।संवाद
(12 बीडीएन-23) कुंवरगांव में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का बैनर लगा मगर सूना पड़ा केंद्र।संवाद