तीन साल पहले सरकारी कागजों में ओडीएफ हुए गांव में आज भी पुरुष तो क्या महिलाएं भी खुले में शौच को जाती हैं। सरकार द्वारा बनाए शौचालय मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं तहसील क्षेत्र के अंतर्गत विकासखंड आसफपुर के गांव पाठकपुर धन्यावली की। यह गांव वर्ष 2014 में तत्कालीन जिलाधिकारी अमित गुप्ता के कार्यकाल में ओडीएफ हुआ था। इस समय शौचालय बनवाने में विभागीय अधिकारियों ने मात्र औपचारिकता निभाई थी। इसके बाद अधिकारियों ने पलट कर गांव की ओर नहीं देखा। गांव में बिना दीवारों के ही शौचालय की सीट लगवा दी गई। कई शौचालय की सीट की क्वालिटी इतनी खराब थी कि उसी समय टूट गईं। कई शौचालय टाट पट्टी बांधकर चालू करवा दिए, लेकिन आज की हालत यह है कि गांव की 70 प्रतिशत से अधिक की आबादी खुले में शौच को जाती है। गांव के ज्यादातर घरों में शौचालय हैं ही नहीं और जहां हैं वह टूट चुके हैं। इस बारे में गांव की कमला देवी ने बताया कि शौचालय बना ही नहीं था। प्रधान ने शौचालय बनवाने का वादा किया था लेकिन आज तक शौचालय नहीं बना। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ओडीएफ होने के समय ही प्रधान की ओर से पांच पांच सौ रुपये एकत्र किए गए थे मगर आज तक शौचालय की सुविधा नहीं मिली है। इस बारे में इंचार्ज खंड विकास अधिकारी सुधीर मिश्रा ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। जानकारी कराकर कार्रवाई की जाएगी। जबकि उपजिलाधिकारी मोहम्मद अवेश ने कहा कि ब्लॉक में टीम को भेजकर शौचालय की मरम्मत का कार्य करवाया जाएगा। साथ ही लोगों को खुले में शौच न जाने को प्रेरित किया जाएगा।